क्षेत्रीय
25-Apr-2026


- छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान के लिए धिरेंद्र शास्त्री, मुख्यमंत्री फडणवीस, नितिन गडकरी और सरसंघचालक माफी मांगें - जब धिरेंद्र शास्त्री छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री, गडकरी और मोहन भागवत चुप क्यों रहे? - छत्रपति शिवाजी महाराज और रामदास स्वामी का संदर्भ जोड़ना गलत, दोनों का कालखंड अलग, इतिहास को तोड़ने का भाजपा का कुटिल प्रयास मुंबई, (ईएमएस)। धिरेंद्र शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में दिया गया बयान अत्यंत आपत्तिजनक है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सरसंघचालक मोहन भागवत की उपस्थिति में यह बयान दिया गया, फिर भी इन तीनों नेताओं ने इसका साधारण विरोध भी नहीं किया। छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करना भाजपा-आरएसएस की राष्ट्रीय नीति बन चुकी है और महाराज के विचार व कर्तृत्व उन्हें स्वीकार नहीं हैं। महाराष्ट्र इस अपमान को कभी सहन नहीं करेगा। इसलिए धिरेंद्र शास्त्री, देवेंद्र फडणवीस, नितिन गडकरी और मोहन भागवत को महाराष्ट्र से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए, ऐसी मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है। मुंबई के दादर स्थित तिलक भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा, आरएसएस और धिरेंद्र शास्त्री की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे हिंदुस्तान के आराध्य हैं। उनके विचारों ने देश और महाराष्ट्र को दिशा दी है। हिंदवी स्वराज्य की संकल्पना संविधान में भी प्रतिबिंबित होती है। यही विचार भाजपा और आरएसएस को स्वीकार नहीं हैं, इसलिए वे लगातार शिवाजी महाराज का अपमान करते हैं, उनके इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भगतसिंह कोश्यारी, मंगल प्रभात लोढ़ा, सुधांशु त्रिवेदी, राहुल सोलापुरकर, प्रशांत कोरटकर और छिंदम जैसे लोगों ने भी शिवाजी महाराज के बारे में अपमानजनक बयान दिए, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं भाजपा नेता जय भगवान गोयल ने ‘आज के शिवाजी: नरेंद्र मोदी’ नामक पुस्तक लिखकर शिवाजी महाराज की तुलना नरेंद्र मोदी से की, जिससे जनता में आक्रोश है। सपकाल ने आगे कहा कि गोलवलकर की ‘बंच ऑफ थॉट्स’ और सावरकर की ‘सात सोनेरी पाने’ में भी शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक उल्लेख किए गए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र का गौरव हैं। जब धिरेंद्र शास्त्री उनके बारे में अपमानजनक बातें कर रहे थे, तब फडणवीस, गडकरी और मोहन भागवत को उसे रोकना चाहिए था। राज्यभर में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। सरकार द्वारा ऐसे लोगों पर कार्रवाई न करना एक गलत संदेश देता है, ऐसा भी उन्होंने कहा। - २५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस