पटना, (ईएमएस)। शुक्रवार को बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद ललन सिंह भी मौजूद रहे। करीब 20 मिनट तक चली इस मुलाकात में क्या बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं सुबह-सुबह एक अणे मार्ग स्थित आवास पर हुई इस शिष्टाचार भेंट ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। भले ही इसे शिष्टाचार भेंट कहा जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने कहीं अधिक गहरे माने जा रहे हैं। खासकर ऐसे समय में जब एनडीए ने 202 सीटों के मजबूत बहुमत के साथ सत्ता संभाली है, सरकार के स्वरूप को लेकर अंदरखाने मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात से पहले नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव के आवास पर भी उनसे बातचीत की। विजेंद्र यादव जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन तथा सरकार दोनों में उनकी अहम भूमिका है। ऐसे में एक ही दिन में नीतीश कुमार का पहले उपमुख्यमंत्री और फिर मुख्यमंत्री से मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार के गठन और विस्तार को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार हो सकता है, जिसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को साधने की कोशिश की जाएगी। भाजपा अपने कोटे से कई नए और युवा चेहरों को मौका दे सकती है, जबकि जेडीयू अपने अनुभवी नेताओं को फिर से जिम्मेदारी सौंप सकती है। इसके अलावा सहयोगी दलों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम हो रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी की पार्टियों को भी उनके प्रदर्शन के आधार पर कैबिनेट में हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एनडीए के भीतर सीटों के अनुपात और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभागों का बंटवारा किया जाएगा। जानकारों की मानें तो यह कैबिनेट विस्तार केवल वर्तमान सरकार के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आगामी ‘मिशन 2029’ यानी लोकसभा चुनाव की रणनीति की भी झलक दिखाई दे सकती है। ऐसे में नए चेहरों को मौका देकर और सामाजिक समीकरणों को संतुलित कर एनडीए लंबी राजनीतिक पारी की तैयारी कर रहा है। फिलहाल, सभी की नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार पर टिकी हैं, जो बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और सत्ता संतुलन की दिशा तय करेगा। - २५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस