भोपाल(ईएमएस)। सफलता की कहानी, मध्यप्रदेश के मंडला जिले के बिछिया ब्लॉक के छोटे से गांव कन्हारीकला की रहने वाली श्रीमती सुहनिया मरावी अपनी मेहनत और लगन से खुद की जिंदगी बदल कर पूरे जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा बन गई हैं। स्थानीय बोली में बर्रा कहे जाने वाले बंजर खेत और सीमित संसाधनों के कारण अभावों में जीने वाली सुहनिया आज आत्मनिर्भर होकर “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं। श्रीमती सुहनिया मरावी के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल से मिलने का अवसर भी प्राप्त हुआ। आजीविका मिशन से बदली तकदीर, बर्रा खेत से शुरू हुई कमाई की नई राह श्रीमती सुहनिया मरावी के परिवार में 4 एकड़ जमीन होने के बावजूद सिंचाई की सुविधा न होने से खेती मुश्किल थी। परिवार का गुजारा मुख्यतः उनके पति प्रमोद मरावी की ट्रक ड्राइविंग की आय पर निर्भर था, जिससे बड़ी मुश्किल से घर चलता था। ऐसी परिस्थिति में सुहनिया के जीवन में बदलाव की शुरुआत आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद हुई। सुहनिया ने गंगा स्व-सहायता समूह का गठन किया और 40 हजार रुपये का ऋण लेकर एक सेकेंड हैंड ट्रैक्टर खरीदा। ट्रैक्टर को किराए पर देकर उन्होंने आय का नया स्त्रोत तैयार किया और जल्द ही ऋण चुका दिया। इसके बाद उन्होंने अपने बंजर खेत को तैयार कर धान की खेती शुरू की। मौसमी बारिश के सहारे मटर जैसी दूसरी फसल भी उगाने लगीं। आत्मविश्वास बढ़ने के साथ सुहनिया ने एक लाख 35 हजार रुपये का ऋण लेकर थ्रेशर मशीन खरीदी। इस मशीन को अन्य किसानों को किराए पर देकर उन्होंने अपनी आय में और वृद्धि की। आज उनके पास ट्रैक्टर, थ्रेशर और लोडर जैसी कृषि मशीनें हैं, जो उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी हैं। हाल ही में उन्हें पशुपालन योजना के तहत एक भैंस भी प्रदान की गई है, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होने की संभावना है। हजारों महिला किसानों को आत्मनिर्भर बना रहीं श्रीमती मरावी श्रीमती सुहनिया मरावी की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें ‘बैगाचक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन’ का डायरेक्टर बनाया गया। उन्होंने बड़ी संख्या में महिला किसानों को जोड़कर उन्हें फसल उत्पादन, विपणन और कारोबार के तरीके सिखाए। इन किसानों के परिवार अब श्री अन्न (कोदो-कुटकी) जैसी फसलों को संगठित तरीके से बेचकर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। हरि प्रसाद पाल / 25 अप्रैल, 2026