- रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा बाजारों पर भी असर, आम आदमी के लिए सस्ता होगा लेनदेन नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका अपने डॉलर को डिजिटल अवतार में पेश करने की तैयारी में है, जिसका वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर गहरा असर पड़ने वाला है। इस स्टेबलकॉइन के आने से दुनिया भर के केंद्रीय और व्यावसायिक बैंकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे उनकी कमाई का एक बड़ा जरिया प्रभावित होगा। गोल्डमैन सैश ने इस कदम को एक आर्थिक तूफान करार दिया है, जो बैंकिंग, विदेशी मुद्रा बाजार और भारत जैसे बड़े रेमिटेंस बाजारों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करेगा। बैंकों की आय का एक अहम हिस्सा विदेशी फंड ट्रांसफर और करेंसी कन्वर्जन पर लगने वाले शुल्क से आता है, लेकिन डिजिटल डॉलर के प्रचलन से ये शुल्क लगभग नगण्य हो जाएंगे। यह डिजिटल मुद्रा 24 घंटे उपलब्ध होगी, जिससे आम आदमी के लिए अंतरराष्ट्रीय लेनदेन सस्ता और सुलभ हो जाएगा। अमेरिकी प्रशासन 2027 से जीनियस एक्ट को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ने यूएस डिजिटल एसेट रेगुलेशन और स्टेबलकॉइन के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है, जो इस वित्तीय बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेंगे। यह कदम निश्चित रूप से वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन के भविष्य को नया आकार देगा। सतीश मोरे/28अप्रैल ---