नई दिल्ली (ईएमएस)। वैश्विक ऊर्जा बाजार में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक ) और ओपेक + गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग होने की घोषणा कर दी। यूएई का यह फैसला 1 मई 2026 से प्रभावी होगा। इसके साथ ही लगभग छह दशक पुरानी सदस्यता समाप्त हो जाएगी। यूएई के इस कदम को वैश्विक तेल बाजार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ओपेक की वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यूएई के ऊर्जा मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के माध्यम से जारी बयान में कहा कि यह निर्णय उत्पादन नीति की व्यापक समीक्षा के बाद लिया गया है। अबू धाबी लंबे समय से यह मानता रहा है कि तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किए गए बड़े निवेश पर ओपेक + की उत्पादन सीमा बाधा बन रही थी। यूएई ने वर्ष 2027 तक अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ओपेक + के कोटा सिस्टम के कारण वह अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई के बाहर होने से वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति रणनीति बदल सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है। यूएई का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब दुनिया पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट की चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुबोध/२८ -०४-२०२६