व्यापार
04-May-2026


- अप्रैल में खरीद प्रबंधक सूचकांक 54.7 पहुंचा, परिचालन स्थितियों में सुस्ती और बढ़ी लागत से चुनौतियां नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद अप्रैल माह में भारतीय विनिर्माण गतिविधियों ने अपनी गति बनाए रखी है। एचएसबीसी द्वारा जारी खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 पर पहुंच गया, जो क्षेत्र में लगातार विस्तार का संकेत है। हालांकि, इसी अवधि में परिचालन परिस्थितियों में पिछले चार सालों की दूसरी सबसे सुस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति का दबाव स्पष्ट दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार उत्पादन, निर्यात सहित नए ऑर्डर और रोजगार में अप्रैल माह में वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनियों के प्रबंधकों ने विज्ञापन और मजबूत मांग को बिक्री और उत्पादन में वृद्धि का कारण बताया। विदेशों से नए ऑर्डर में भी सात महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, चीन और खाड़ी देशों से महत्वपूर्ण योगदान मिला। हालांकि एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पीएमआई में बढ़ोतरी के बावजूद परिचालन परिस्थितियों में सबसे सुस्त वृद्धि दर्ज हुई है। पश्चिम एशिया संकट का असर अब स्पष्ट रूप से मुद्रास्फीति पर दिख रहा है। लागत अगस्त 2022 के बाद सबसे तेजी से बढ़ी है, वहीं उत्पादों की कीमतें पिछले छह महीने में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। एल्यूमीनियम, रसायन, ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों सहित विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन इसकी रफ्तार कम से कम साढ़े तीन साल में सबसे धीमी रही है। कुल मिलाकर मुद्रास्फीति की दर अगस्त 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर रही, जिसके कारण विनिर्माताओं को अपने उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी करनी पड़ी। हालांकि, उपभोक्ता उत्पाद एकमात्र उपवर्ग रहा जहां कीमतों में कमी आई। सतीश मोरे/04मई ---