क्षेत्रीय
04-May-2026
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- छावनी रहवासियों को सताने लगा बेदखली का डर जबलपुर (ईएमएस)। सदर बाजार मुख्य मार्ग से लगे हुए मेंहदीबाग बंगले की जमीन पर बने मकानों को लेकर चल रहे आर्मी स्टेशन सेल के सर्वे से हड़कंप मच गया। यहां रह रहे परिवारों को यह डर सताने लगा है कि सर्वे के बाद उन्हें उक्त जगह से बेदखल कर दिया जाएगा। दरअसल, केंद्र सरकार कैंट के सिविल एरिया को समीपस्थ निकायों के हवाले करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार छावनी क्षेत्रों के नागरिक इलाकों को स्थानीय निकायों को सौंपने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसी क्रम में सेना ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन और पुराने बंगलों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। मेहंदीबाग में आर्मी स्टेशन सेल, छावनी बोर्ड और रक्षा संपदा कार्यालय की संयुक्त टीम द्वारा पुराने अनुदान वाले बंगलों का सर्वे और ऑडिट शुरू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। सर्वे टीम घर-घर पहुंचकर दस्तावेजों और जमीन की स्थिति की जांच कर रही है। इस दौरान रहवासियों को बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन सेना के अधीन आती है। इस पूरी प्रक्रिया में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के अधिकारी भी शामिल हैं, जिससे कार्रवाई को और गंभीर माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इस सर्वे को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इन बंगलों में रह रहे हैं और अब अचानक सर्वे के नाम पर उन्हें असमंजस में डाल दिया गया है। लोगों को यह भी डर है कि आगे चलकर उन्हें मकान खाली करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व छावनी बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चिंटू चौकसे और युवा कांग्रेस नेता राहुल रजक ने सर्वे का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा लोगों को डराया जा रहा है। उनका कहना है कि पीढ़ियों से रह रहे परिवारों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है और बिना स्पष्ट नीति के ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक जबलपुर छावनी क्षेत्र में करीब 29 ऐसे पुराने अनुदान वाले बंगले हैं, जो इस समय जांच के दायरे में हैं। इनमें से अधिकांश में नागरिक निवास कर रहे हैं, जबकि कुछ बंगले खाली पड़े हैं या जर्जर होकर गिर चुके हैं। कुछ संपत्तियों को आर्मी स्टेशन सेल अपने प्रबंधन में ले चुका है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी पुराने परिवार रह रहे हैं। फिलहाल सर्वे का काम जारी है, लेकिन जिस तरह से रहवासियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन रही है, उससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं। सुनील साहू / शहबाज / 04 मई 2026/ 06.11