व्यापार
05-May-2026


-भारत की कई कंपनियों से चल रही बात, सौदे को लेकर बाजार में काफी हलचल नई दिल्ली,(ईएमएस)। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चीनी कंपनी टीसीएल इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में अपने डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग कारोबार में 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डील का आकार 600 से 800 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,700 करोड़ रुपए से 7,600 करोड़ रुपए के बीच हो सकता है। इस सौदे को लेकर बाजार में काफी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस डील में स्टैंडर्ड चार्टर्ड सलाहकार की भूमिका निभा रही है। वहीं डिक्सन टेक्नोलॉजीज, ईपैक ड्यूरेबल, सिर्मा एसजीएस टेक्नोलॉजी, एम्बर एंटरप्राइजेज और ऊनो मिंडा जैसी भारतीय कंपनियों से बातचीत चल रही है। हालांकि अभी तक किसी तरह का अंतिम समझौता नहीं हुआ है और चर्चा शुरुआती चरण में है। खबर यह भी है कि हैवेल्स से भी संपर्क किया गया था, लेकिन कंपनी ने डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग कारोबार में निवेश को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। भारत में टीसीएल इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रमुख यूनिट आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित है। यह देश का पहला ऐसा एलसीडी पैनल प्लांट माना जाता है, जहां पूरी प्रोसेसिंग और असेंबली की सुविधा उपलब्ध है। इस यूनिट में टीवी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और ऑटोमोबाइल स्क्रीन में इस्तेमाल होने वाले डिस्प्ले कंपोनेंट तैयार किए जाते हैं। कंपनी की यह यूनिट टीसीएल चाइना स्टार ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी के तहत संचालित होती है, जो टीसीएल कॉर्प की वैश्विक सहयोगी कंपनी है। सूत्रों के अनुसार टीसीएल अपनी भारतीय इकाई में दो स्थानीय साझेदार जोड़ना चाहती है और 49 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखकर सबसे बड़ी शेयरधारक बनी रहना चाहती है। बताया जा रहा है कि टीसीएल रणनीतिक और वित्तीय निवेशकों की तलाश में है और अगले दो से तीन महीनों में इस डील को अंतिम रूप दिया जा सकता है। कंपनी ने तिरुपति स्थित प्लांट में शुरुआती चरण में 1,800 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। यह फैक्ट्री हर साल करीब 80 लाख टीवी पैनल और 3 करोड़ मोबाइल डिस्प्ले तैयार करने की क्षमता रखती है। इसकी वार्षिक कमाई करीब 1,500 करोड़ रुपए बताई जा रही है। माना जा रहा है कि भारत सरकार की स्थानीय साझेदारी और निवेश बढ़ाने की नीति के चलते कंपनी भारत में अपना जोखिम कम करने और स्थानीय भागीदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सिराज/ईएमएस 05मई26