-दूसरी तरफ कई देश रेयर अर्थ मिनिरल्स को पाने कर रहे डील्स मॉस्को,(ईएमएस)। दुनिया में जब एडवांस मिसाइलों की बात होती है, तब महंगे और बहुत मुश्किल से मिलने वाले रेयर अर्थ मिनिरल्स की जरूरत महसूस होती है। दुनिया के कई देश इस रेयर अर्थ मिनिरल्स को पाने के लिए तरह-तरह की डील्स कर रहे है। लेकिन किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक देश ‘बर्तन धोने वाली मशीन’ से मिसाइल बनाएगा और भी इतनी घातक कि उसके जरिए युद्ध के मैदान में तबाही मचा देगा। ये काम किया है कि भारत के दोस्त रूस ने कर दिखाया है। जिस पर अमेरिका ने ने इतने तगड़े प्रतिबंध लगाए थे कि हथियार बनाना, तब क्या उसके कल-पुर्जे भी रूस के हाथ नहीं लग पा रहे थे। फिर राष्ट्रपति पुतिन ने वहां जुगाड़ लगाया जो शायद ही कोई वर्ल्ड लीडर के दिमाग में आया होगा। जब अमेरिका और उसके साथियों ने रूस की घेराबंदी करने के लिए तकनीकी सामान की सप्लाई पर पूरी तरह से बंद कर दी, तब दुनिया को लगा कि अब पुतिन के टैंक और मिसाइलें कबाड़ साबित होगी। लेकिन हकीकत इसके उलट निकल गई। रूस ने एक ऐसी चौंकाने वाली तकनीक अपनाई है, जिसने वॉशिंगटन के बड़े-बड़े जानकारों की नींद उड़ा दी है। रूस अब अपनी घातक मिसाइलों को उड़ाने के लिए उन चिप्स का इस्तेमाल कर रहा है जो आपके घर के डिशवॉशर यानी बर्तन धोने वाली मिशन और फ्रिज में लगी होती हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों का मानना था कि अगर रूस को एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स चिप्स नहीं मिलते हैं, उसका मिलिट्री पावर ध्वस्त होगा। ये तर्क सही भी है क्योंकि आज के दौर में मिसाइलें लोहे से नहीं, बल्कि माइक्रोचिप्स से चलती हैं लेकिन रूस ने ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला की अमेरिका की नींद उड़ गई। रुस ने कजाकिस्तान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में रातों-रात हजारों फर्जी कंपनियां खड़ी कर दीं। ये कंपनियां टैंक या गन नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में यूरोपीय डिशवॉशर, वॉशिंग मशीन और यहां तक कि इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप खरीद रही थीं। जैसे ही ये घरेलू सामान रूस की सीमा में दाखिल होते, ये बाजारों से गायब होकर सीधे सेना के गुप्त गोदामों में पहुंच जाते। वहां इंजीनियर इन मशीनों का पोस्टमार्टम कर उनके अंदर से ‘माइक्रो-कंट्रोलर्स’ निकालकर अपने काम में लेते थे। हैरान करने वाली बात ये है कि एक 35-40 हजार रुपए के साधारण डिशवॉशर में उतनी ही कंप्यूटिंग पावर होती है जितनी कि 18-19 करोड़ की एक रूसी ‘कैलिबर’ क्रूज मिसाइल को गाइड करने के लिए चाहिए। रूसी सेना इन ‘ड्यूल-यूज’ वाले चिप्स को मिसाइलों, ड्रोन और टैंकों के सर्किट में फिट कर रही है। जहां पश्चिम हाई-टेक निर्यात को ट्रैक करने में लगा था, वहीं रूस ने घर-घर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को हथियार में बदल दिया। आशीष/ईएमएस 06 मई 2026