अंतर्राष्ट्रीय
06-May-2026
...


-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई ईरान की घेराबंदी न्यूयॉर्क,(ईएमएस)। समंदर की लहरों पर बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पर मंडराते खतरे के बीच, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। पिछले महीने रूस और चीन द्वारा वीटो का इस्तेमाल कर अमेरिकी प्रस्ताव को रोकने के बाद, अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रणनीति बदलते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक नया और बेहद केंद्रित प्रस्ताव लाने की तैयारी पूरी कर ली है। सोमवार, 4 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इस नए कूटनीतिक कदम की पुष्टि की। यह नया प्रस्ताव मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों के मार्ग में बाधा डालने, समुद्री सुरंगें बिछाने और जहाजों से अवैध रूप से टोल वसूलने की कोशिशों के जवाब में तैयार किया गया है। अमेरिका इस बार अकेले नहीं है, वह बहरीन के साथ मिलकर इस मसौदे को अंतिम रूप दे रहा है, जिसमें कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली खाड़ी देशों का महत्वपूर्ण इनपुट शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन ने अपनी पिछली विफलता से सबक लेते हुए इस बार फोकस्ड अप्रोच अपनाई है। राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, पिछला प्रस्ताव एक व्यापक पहल थी जिसे रूस और चीन ने आसानी से निशाना बनाया, लेकिन वर्तमान प्रस्ताव केवल समुद्री व्यापार की सुरक्षा और अवैध टोलिंग तक सीमित है। इसका सीधा असर एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, ऐसे में अमेरिका को उम्मीद है कि इस बार वैश्विक समर्थन जुटाना आसान होगा। प्रस्ताव के मसौदे में ईरान के सामने सख्त मांगें रखी गई हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि ईरान तुरंत जहाजों पर हमले बंद करे और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में टोल वसूलने के प्रयासों को रोके। सबसे महत्वपूर्ण मांग समुद्री सुरंगों को लेकर है, प्रस्ताव में ईरान से बिछाई गई सभी सुरंगों की सटीक संख्या और उनकी लोकेशन सार्वजनिक करने को कहा गया है ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए यह मार्ग सुरक्षित हो सके। रूस और चीन के रुख पर टिकी नजरें वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन इस कूटनीतिक हलचल ने तेहरान से लेकर मॉस्को तक खलबली मचा दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस और चीन इस बार भी अपने वीटो के ब्रह्मास्त्र से ईरान का बचाव करेंगे? जानकारों का कहना है कि चूंकि इस बार मुद्दा सीधे तौर पर वैश्विक तेल संकट और एशियाई बाजारों की स्थिरता से जुड़ा है, इसलिए बीजिंग और मॉस्को के लिए ईरान का अंधसमर्थन करना कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, होर्मुज के इस चक्रव्यूह ने खाड़ी क्षेत्र में कूटनीति की बिसात को बेहद दिलचस्प बना दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस 06 मई 2026