अंतर्राष्ट्रीय
06-May-2026
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इजरायल-लेबनान युद्ध में हिजबुल्ला कर रहा अंदरुनी हमला बेरुत(ईएमएस)। इजरायल और लेबनान के बीच जारी खूनी संघर्ष ने अब एक नया और तकनीकी रूप से खतरनाक मोड़ ले लिया है। हिजबुल्ला ने युद्ध के मैदान में एक ऐसा एडवांस हथियार उतारा है, जिसने इजरायल की आधुनिक रक्षा प्रणालियों को चुनौती दे दी है। यह हथियार है फाइबर ऑप्टिक ड्रोन। यह वही तकनीक है जिसका रूसी सेना ने यूक्रेन युद्ध में यूक्रेनी ठिकानों को तबाह करने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। अब हिजबुल्ला इन्हीं ड्रोनों के जरिए इजरायली सैनिकों पर सटीक हमले कर रहा है, जिससे इजरायल की अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक और जैमर्स बेअसर साबित हो रहे हैं। सामान्य ड्रोन रेडियो सिग्नल या वायरलेस कंट्रोल पर काम करते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए आसानी से जाम किया जा सकता है। इसके विपरीत, फाइबर ऑप्टिक ड्रोन एक बहुत ही पतले और हल्के फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए अपने ऑपरेटर से जुड़ा होता है। यह केबल करीब 15 किलोमीटर या उससे भी अधिक लंबा हो सकता है। केबल के माध्यम से ऑपरेटर को हाई-रेजोल्यूशन लाइव वीडियो मिलता है और वह सुरक्षित स्थान पर बैठकर ड्रोन को नियंत्रित करता है। चूंकि इसमें कोई रेडियो फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल नहीं होती, इसलिए इजरायल के सिग्नल जैमर्स इसे नहीं रोक पाते और न ही इसके लॉन्चिंग पॉइंट का पता लगाया जा सकता है। हाल ही में हिजबुल्ला द्वारा जारी एक वीडियो में देखा गया कि कैसे एक छोटा क्वाडकॉप्टर ड्रोन इजरायली सैनिकों के बिल्कुल करीब पहुंचकर आत्मघाती हमला करता है। इस हमले में 19 वर्षीय इजरायली सैनिक सार्जेंट इडान फूक्स की जान चली गई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिजबुल्ला को यह तकनीक ईरान के जरिए रूस से मिली है। रूस और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का परिणाम अब मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इस लो-टेक लेकिन बेहद प्रभावी हथियार की काट ढूंढना इजरायल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यूक्रेन युद्ध में यूक्रेनी सैनिकों को इन ड्रोनों के तारों को हवा में ही काटने की ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन इजरायल के लिए यह एसीमिट्रिक वॉरफेयर (असमान युद्ध) का एक नया और घातक पहलू है। फाइबर ऑप्टिक ड्रोन की कम लागत और जैमिंग-प्रूफ क्षमता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में केवल महंगे हथियार ही नहीं, बल्कि सस्ती और स्मार्ट तकनीक भी पासा पलट सकती है। फिलहाल, इजरायली सेना इन ड्रोनों के खिलाफ फिजिकल बैरियर और अन्य सुरक्षात्मक उपायों पर विचार कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 06 मई 2026