सेना को सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध कराएगी नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत अब अपनी सीमाओं को मजबूत करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है, खासकर चीन से सटी सीमा पर सड़क और टनल निर्माण पर तेजी से काम कर रहा है। अतीत में चीन सीमा पर हुए तनावपूर्ण अनुभवों से सबक लेकर, देश अब चाक-चौबंद व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कड़ी में, दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग का निर्माण चीन सीमा के करीब हो रहा है, जो अगले दो सालों में बनकर तैयार हो जाएगी है। यह सुरंग हर मौसम में कनेक्टिविटी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे सामरिक और नागरिक दोनों दृष्टियों से बड़ा लाभ होगा। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की अगुवाई में शिंकुन ला टनल का निर्माण कार्य जुलाई 2024 में आरंभ हुआ था और अगस्त 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय हुआ है। यह टनल हिमाचल प्रदेश से लद्दाख के बीच, शिंकुन ला दर्रे के नीचे से बनाई जा रही है। वर्तमान में सर्दियों के मौसम में यह दर्रा दुर्गम हो जाता है, जिससे कनेक्टिविटी बाधित होती है। इस टनल के बनने के बाद हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी से लद्दाख की जांस्कर घाटी तक सीधी कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी। शिंकुन ला टनल को 15,800 फीट की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है, जिसकी लंबाई 4.81 किलोमीटर होगी। यह दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सुरंग बनाती है, क्योंकि इतनी ऊंचाई पर अभी तक कोई अन्य टनल नहीं बनी है। यह क्षेत्र चीन सीमा के बेहद करीब है, लिहाजा इसका सामरिक महत्व काफी है। टनल के तैयार होने के बाद भारतीय सेना को रसद आपूर्ति, हथियारों और टैंकों के परिवहन में मौसम संबंधी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव होगा। बीआरओ ने महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रोजेक्ट योजक के तहत 1,681 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार करने की जिम्मेदारी ली है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य निमू-पदम-दारचा मार्ग के जरिए हिमाचल प्रदेश और लद्दाख को जोड़ना है, जो चीन सीमा के अत्यंत समीप से गुजरता है। सुरंग के निर्माण में कई खतरनाक जोखिमों को ध्यान में रखकर सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सुरंग के भीतर ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने और हर 500 मीटर पर क्रॉस पैसेज बनाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षित निकासी के लिए मुख्य सुरंग से 100 से 500 मीटर की दूरी पर आपातकालीन एग्जिट द्वार भी बनाए जा रहे हैं। यह टनल न केवल सेना के लिए एक सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध कराएगी, बल्कि आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी हिमाचल से लद्दाख की यात्रा को आसान बनाएगी। सुरंग की लंबाई करीब 4.1 किलोमीटर है, जो चीन सीमा के पास सेना को हथियार, उपकरण और खाद्य सामग्री की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस टनल के माध्यम से लद्दाख का देश के अन्य हिस्सों से जुड़ाव मजबूत होगा, जिससे इस क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। आशीष दुबे / 06 मई 2026