:: सेंधवा और पाटी के पहाड़ों पर हाथों से खींचकर पहुँचाए खंभे, वनवासियों के जीवन में आया उजाला :: इंदौर (ईएमएस)। मालवा-निमाड़ के अत्यंत दूरस्थ वन क्षेत्रों में बसे जनजातीय परिवारों के लिए यह साल खुशियों की नई रोशनी लेकर आया है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जुगा) और आरडीएसएस योजना के तहत एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक असंभव माना जा रहा था। कंपनी ने उन मजरों, टोलों और फलियों तक स्थाई बिजली पहुँचा दी है, जहाँ केवल दो से पांच मकानों के समूह बसे हुए हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के नेतृत्व में धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जैसे जिलों में यह विशेष अभियान चलाया गया। सबसे बड़ी चुनौती बड़वानी के पाटी और सेंधवा जैसे क्षेत्रों में थी, जहाँ वनवासी परिवार सामान्य धरातल से करीब 500 मीटर की ऊँचाई पर पहाड़ियों पर बसे हैं। दुर्गम रास्ता होने के कारण यहाँ वाहन ले जाना मुमकिन नहीं था, ऐसे में बिजली विभाग के कर्मियों ने कड़ी मेहनत कर पोल, केबल और भारी-भरकम ट्रांसफार्मर हाथों से उठाकर या खींचकर ऊँचाइयों तक पहुँचाए। :: अस्थाई तारों के डर से मिली मुक्ति :: खरगोन जिले के भगवानपुरा विकासखंड के अंतर्गत सेजला गांव के सरपंच कालू भाई बताते हैं कि उनके फलिए में रहने वाले परिवारों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। पहले लोग अस्थाई रूप से असुरक्षित तार बिछाकर जैसे-तैसे बिजली का इंतजाम करते थे, जिससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता था। अब स्थाई लाइन, मीटर और पर्याप्त वोल्टेज मिलने से चौबीस घंटे निर्बाध बिजली मिल रही है। :: 3 किमी दूर बसे घर भी हुए सूचीबद्ध :: प्रशासन ने इस अभियान में सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाई। मूल गांव या बस्ती से एक से तीन किलोमीटर की दूरी पर बसे दो-चार घरों के समूहों को भी बिजली से जोड़ने के लिए सूचीबद्ध किया गया। कंपनी स्तर पर इस अभियान की दैनिक समीक्षा की जा रही है। कार्य को समय सीमा में पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में पोल, ट्रांसफार्मर और श्रमिक बल का प्रबंध किया गया है, ताकि वनवासी क्षेत्रों के विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। प्रकाश/06 मई 2026