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07-May-2026


- 2,100 से अधिक केंद्र बने, दो साल में राजस्व में 50 फीसदी से अधिक का उछाल नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) ने प्रौद्योगिकी उद्योग में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। नैसकॉम और जिनोव की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के अंत तक इन केंद्रों का अनुमानित राजस्व रिकॉर्ड 98.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो दो साल पहले के 65 अरब डॉलर से 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि है। यह उल्लेखनीय उछाल देश के प्रौद्योगिकी परिदृश्य में जीसीसी की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और मूल्य-संचालित नवाचार की ओर उनके बदलाव को दर्शाता है। देश में जीसीसी की संख्या भी 2,000 को पार कर 2,117 तक पहुंच गई है, जो एक साल पहले लगभग 1,760 थी। इनमें से 583 केंद्र प्रति वर्ष 10 करोड़ डॉलर से 1 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं, जबकि 423 केंद्र 10 करोड़ डॉलर से कम कमाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जीसीसी का यह तीव्र विकास मूल्य-संचालित केंद्रों में बदलाव, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) उत्कृष्टता केंद्रों की बढ़ती संख्या, उच्च कुशल कार्यबल और विश्वविद्यालयों के साथ कौशल-विकास सहयोग जैसे प्रमुख कारकों पर आधारित है। नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने इस बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि एआई एक उत्प्रेरक के रूप में काम कर रहा है और भारत वैश्विक उत्पादों व प्लेटफार्मों के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। लगभग 75 फीसदी भारतीय जीसीसी में अगले पांच वर्षों में परिवर्तनकारी हब बनने की क्षमता है, जिसके लिए जटिल कार्यों की ओर बढ़ना, एआई-सक्षम कार्यबल तैयार करना और व्यावसायिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक होगा। ये केंद्र करीब 23.6 लाख लोगों को रोजगार देते हैं, जिनमें बेंगलुरु (34 फीसदी) और हैदराबाद (14 फीसदी) प्रमुख रोजगार केंद्र हैं, जिसके बाद चेन्नई और पुणे का स्थान आता है। सतीश मोरे/07मई ---