- विकसित भारत 2047 के लिए ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा पर जोर नई दिल्ली (ईएमएस)। ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं और बाहरी आर्थिक झटकों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में कमी आ सकती है। एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल ने एक संयुक्त रिपोर्ट में यह आशंका जताई, जिसमें देश की विकास दर 7.1 प्रतिशत के पिछले अनुमान से घटकर 6.6 प्रतिशत रहने की बात कही गई है। यह गिरावट वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अस्थिर बाजार स्थितियों का परिणाम है। इंडिया फारवर्ड शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस समय ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं, तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी आर्थिक झटकों का सामना कर रहा है। ऐसी स्थिति में विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़े सुधारों के साथ-साथ रणनीतिक भंडार तैयार करने के लिए एक व्यापक ऊर्जा भंडारण नीति की आवश्यकता पर बल दिया गया है। क्रिसिल के एक अर्थशास्त्री ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के लंबा खिंचने से रुपए में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अर्थव्यवस्था पर दोहरा झटका डाल रही है, जिससे वृद्धि पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने मौजूदा हालात में ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की वकालत की, खासकर रबी फसलों के लिए उर्वरक की संभावित कमी को देखते हुए। हालांकि, खरीफ फसलों के लिए स्थिति अभी बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर अधिक दिखेगा, जबकि सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखने के कारण खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा। हालांकि, वाणिज्यिक एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं। मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति 3.4 फीसदी के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि थोक मुद्रास्फीति 3.88 फीसदी के 38 महीने के उच्च स्तर पर रही। अप्रैल के मुद्रास्फीति आंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे केंद्रीय बैंक की चिंताएं बढ़ सकती हैं। सतीश मोरे/07मई ---