राज्य
07-May-2026
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- जमीनी स्तर पर जागरूकता लाने पुलिस का उपाय - सोशल मीडिया के माध्यम से भी अवयरनेस का प्रयास कोरबा (ईएमएस) डिजिटल लेनदेन ने हर हाथ में मोबाइल पहुंचा दिया है, लेकिन मोबाइल यूजर्स जागरूकता के अभाव में सायबर ठगों के झांसे में फंसकर ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन ठगी पर लगाम कसने और आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए सायबर पुलिस ने एक खास पहल करते हुए च्वाइस सेंटर व मोबाइल दुकान संचालकों को सायबर दूत बनाया है। इसके लिए सायबर सेल प्रभारी निरीक्षक ललित चंद्रा व उनकी टीम ने च्वाइस सेंटर व मोबाइल दुकान संचालकों की बैठक लेकर सायबर सुरक्षा और जन-जागरूकता के विशेष टिप्स दिया है। दरअसल चाहे वो शहरी क्षेत्र हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र हर जगह लोग अक्सर च्वाइस सेंटर और मोबाइल दुकानों पर रिचार्ज या बैंकिंग कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ये सायबर दूत फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका निभा सकते हैं। संचालकों को निर्देशित किया गया कि वे ग्राहकों के मोबाइल देने पर उसपर एक नजर डाले और अनावश्यक और संदिग्ध ऐप्स होने पर उसकी जानकारी देकर हटा देवें। साथ ही उनके मोबाइल पर सिक्योरिटी कोड इस तरह से तगड़ा कर दे कि असानी से ऑनलाइन ठग या हैकर एक्सेस हासिल न कर सकें। सायबर दूत बनाने के साथ ही च्वाइस सेंटर व मोबाइल दुकान संचालकों से सायबर फ्रॉड से जुड़ी सूचना आदान-प्रदान करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक ग्रुप बनाया गया है, जिसमें सायबर थाना से जरूरी कंटेंट भी साझा किया जा रहा है। च्वाइस सेंटर व मोबाइल दुकान संचालकों को सायबर थाना की टीम ने विशेष रूप से प्रशिक्षित किया कि वे ग्राहकों को जानकारी देते हुए बताए गए अज्ञात लिंक से दूर रहें और किसी भी अनजान व्हाट्सएप संदेश या एसएमएस में आए लिंक पर क्लिक न करें। ओटीपी की गोपनियता की जानकारी देते हुए बताए कि बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वालों को कभी भी ओटीपी साझा न करें। केवाईसी अपडेट का झांसे से भी बचने के लिए सलाह देते हुए बताए कि बिजली बिल या बैंक अकाउंट बंद होने के नाम पर डराने वाले कॉल से सावधान रहें। सायबर थाना की टीम ने बैंक प्रबंधकों की भी बैठक ली। जिसमें प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिया गया कि उनके बैंक में खाताधारकों का खाता होल्ड होने पर वहां पहुंचने वाले ग्राहकों को सीधे पुलिस थाना न भेजे। खाता होल्ड होने पर वे उनकी मदद करें और खाता खुलवाने के लिए प्रयास करें। अपराधिक मामले होने पर ही ग्राहकों को भेजे। यह कार्य बैंक में प्राथमिकता से होनी चाहिए। बैंक कर्मी बिना ज्यादा सुने लोगों को सीधे थाना भेज दिया जाता है जिससे लोग भटकते हुए परेशान होते हैं। सायबर थाना प्रभारी निरीक्षक ललित चंद्रा के मुताबिक पुलिस द्वारा सोशल मीडिया के साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाकर सायबर ठगी से लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में च्वाइस सेंटर और मोबाइल दुकान संचालकों को जोड़कर उनके माध्यम से यह जागरूकता अभियान जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। इस पहल से भोले-भाले ग्रामीण सायबर ठगी के जाल में फंसने से बच सकेंगे। - 07 मई