लेख
07-May-2026
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- सियासी गलियारे के आरोप-प्रत्यारोप पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के जो परिणाम आए हैं उसको लेकर पश्चिम बंगाल के साथ-साथ सारे देश में इसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद टीएमसी के कार्यालयों पर हमले शुरू हो गए। बड़े स्तर पर अनेक लोगों पर हमले हुए, जिसके चलते अब तक 6 से ज्यादा लोगों की मरने की खबरें सामने आईं हैं। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और वीर भूमि में भारी हिंसा हुई। टीएमसी के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। उनके कार्यकर्ताओं की हत्या भी की गई। इसको लेकर राजनीति गरमा गई है। इसी बीच भाजपा के मुख्यमंत्री पद के संभावित नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या करने का तरीका किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा है। सड़क पर पहले कार को ओवरटेक कर रोका जाता है, फिर दो पहिया वाहने से हत्यारे आते हैं और गोलियां बरसा कर चले जाते हैं। इस हत्या को लेकर तरह-तरह के आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। निजी सहायक चंद्रनाथ रथ को जिन अज्ञात हमलावरों ने गोली मारी उन्हें लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि वे टीएमसी के थे। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के गुंडो ने रथ की हत्या की है। इससे पहले टीएमसी इस हत्या की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर चुकी है। इसके साथ ही इस मामले में अब टीएमसी भाजपा के ऊपर उल्टा आरोप लगा रही है। उसका आरोप है, कि जिस तरह से पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद टीएमसी के कार्यालय को तोड़ा गया, उनके कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारा गया, उससे बचने और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ही भाजपा यह आरोप लगा रही है। टीएमसी के नेताओं का तो यहां तक आरोप है, कि चंद्रनाथ रथ की हत्या स्वयं बीजेपी के द्वारा कराई गई है। दरअसल रथ के पास कई ऐसे राज थे, जिससे आगे चलकर खासी परेशानी खड़ी हो सकती थी। उन राजों को छिपाने के लिए ही चंद्रनाथ रथ की हत्या कराई गई है। टीएमसी के कार्यकर्ताओं का ना तो उससे कोई सीधा विरोध था ना ही वह किसी विवाद में शामिल थे। ऐसी स्थिति में यदि उसकी हत्या हुई है तो इसमें कोई ना कोई राज तो है, जिसे छिपाने के लिए उसकी हत्या की गई है। हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जो हमलावर थे वह बांग्लादेश की बॉर्डर की तरफ भागे थे। ऐसी स्थिति में यह भी कहा जा रहा है कि भाड़े के हत्यारे बांग्लादेश से बुलाए गए थे और उन्हीं के द्वारा यह हत्या कराई गई है। ताकि हमेशा, हमेशा के लिए चंद्रनाथ रथ के पास जो राज थे उसके सीने में ही दफन होकर रह जाएं और वह कभी उजागर ना हो सकें। बहरहाल जब से चुनाव अधिसूचना जारी हुई है, उसके बाद से संपूर्ण शासन-प्रशासन और हर गतिविधि में ममता सरकार या टीएमसी का कोई लेना-देना नहीं है। टीएमसी का आरोप है, जब लाखों की संख्या में अर्धसैनिक बलों को लाकर पश्चिम बंगाल में तैनात किया गया है, वही सारी व्यवस्थाओं को देख रहे हैं, ऐसी स्थिति में टीएमसी के ऊपर आरोप लगाकर सुवेंदु अधिकारी और भाजपा क्या छिपाना चाहती है? इसके लिए इस हत्याकांड की जांच बड़े स्तर पर सीबीआई द्वारा होनी चाहिए। जांच में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए और जो भी हत्यारे हों उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग टीएमसी की ओर से आ रही है। बहरहाल देश और पश्चिम बंगाल में जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसमें इस तरह के आरोप एक दूसरे के ऊपर लगाना बड़ा आम हो गया है। लेकिन इतना तो तय है, निजी सहायक चंद्रनाथ रथ से टीएमसी और ममता बनर्जी का कोई खतरा या वास्ता था ही नहीं। ऐसी स्थिति में उसकी हत्या निश्चित रूप से किसी राजनीतिक कारणों से हुई है। यह राजनीतिक कारण अब सुवेंदु अधिकारी से जुड़ते चले जा रहे हैं, जिसके कारण पश्चिम बंगाल की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। इस मामले का जितना जल्द निराकरण हो उतना अच्छा है, अन्यथा यह मामला आगे चलकर और भी हिंसात्मक घटनाओं को आगे बढ़ा सकता है। वैसे लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं होती है, इसलिए इस हत्याकांड की जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। ईएमएस / 07 मई 26