क्षेत्रीय
07-May-2026
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- हेडक्वार्टर में उच्च स्तरीय बैठक के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कोरबा (ईएमएस) सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना कुसमुंडा क्षेत्र में भू-विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 8 बजे से प्रदर्शनकारियों ने खदान में कोयला खनन और परिवहन कार्य में लगी मशीनों को रोक दिया। लगभग 5 घंटे तक चले इस चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन के बाद प्रबंधन द्वारा मांगों पर सकारात्मक पहल के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त किया गया। # भूविस्थापितों ने अपनी समस्याओं के स्थायी निराकरण के लिए प्रबंधन के समक्ष रखे प्रमुख बिंदु - अर्जन के बाद जन्म (नीति निर्धारण) जमीन अधिग्रहण के बाद परिवार में जन्मे सदस्यों के लिए रोजगार और पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनाई जाए। - लंबित प्रकरणों का निपटारा वर्षों से लंबित पड़े पुराने मामलों की फाइलें धूल फांक रही हैं जिनका तत्काल निराकरण हो। - अवैध कब्जे पर अंकुश बलरामपुर दुरपा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे गैर-कानूनी कब्जों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए। - आउटसोर्सिंग में स्थानीय भागीदारी खदान में संचालित आउटसोर्सिंग कार्यों में स्थानीय भूविस्थापितों को प्राथमिकता दी जाए। आंदोलन की उग्रता को देखते हुए कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की वार्ता के दौरान प्रबंधन ने भूविस्थापितों की मांगों को जायज माना और आश्वासन दिया। - उच्च स्तरीय बैठक पांच दिनों के भीतर सीएमडी बिलासपुर स्तर पर एक आवश्यक बैठक आहूत की जाएगी जिसमें विस्थापितों की नीतिगत समस्याओं का स्थायी निराकरण खोजा जाएगा। - तत्काल रोजगार कोयला और मिट्टी उत्खनन कार्य में लगी आउटसोर्सिंग कंपनियों में 15 भूविस्थापितों को स्थायी रूप से रोजगार देने की मांग पर प्रबंधन ने मुहर लगाई है, एक सप्ताह के भीतर इन्हें काम पर रखने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। जिनके नेतृत्व में यह आंदोलन हुआ गोमती केवट ने क्या कहा, यह हमारे हक की लड़ाई है प्रबंधन ने पांच दिनों के भीतर सीएमडी स्तर की बैठक और 15 विस्थापितों को तत्काल रोजगार देने का भरोसा दिया है यदि समय सीमा के भीतर वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन और भी उग्र होगा। प्रबंधन के ठोस आश्वासन और सकारात्मक रुख के बाद दोपहर एक बजे भूविस्थापितों ने खदान का कार्य सुचारू रूप से चलने दिया और धरना समाप्त किया। - 07 मई