6 साल बाद भी प्यासा है देवहारा, हवा उगल रहे नल, नदी की झिरिया से प्यास बुझाने को मजबूर ग्रामीण जन मण्डला (ईएमएस)। जिले के विकासखंड घुघरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत देवहारा में सरकार की महत्वाकांक्षी नलजल योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। करीब एक हजार की जनसंख्या और 400 घरों वाले इस गांव में पिछले छह वर्षों से नलजल योजना का कार्य चल रहा है, लेकिन आज दिनांक तक ग्रामीणों को इस योजना से पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई है। विडंबना यह है कि ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुँचने से पहले ही बिजली विभाग ने पंचायत को लाखों रुपये का बिल थमा दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नलजल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण तो किया गया, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि शुरुआती दौर में ही टंकी से रिसाव होने लगा। हालांकि बाद में इसकी मरम्मत की गई, लेकिन मरम्मत के बाद आज तक टंकी में पानी नहीं भरा गया है। ठेकेदार की लापरवाही यहीं नहीं रुकी, पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मुख्य मार्ग से देवहारा तक के मार्ग को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। ना तो सड़क को दुरुस्त किया गया और ना ही पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूर्ण हुआ। नल उगल रहे हवा, 200 घरों में कनेक्शन भी अधूरे योजना के दावों के विपरीत धरातल पर स्थिति बेहद भयावह है। गांव के 400 घरों में से केवल 200 घरों में ही नल के कनेक्शन लगाए गए हैं, जबकि आधे गांव में अब भी पाइपलाइन का इंतजार है। जिन घरों में कनेक्शन लग चुके हैं, वहां भी नलों से पानी की जगह सिर्फ हवा निकल रही है। सरपंच हरीश चंद मरकाम ने बताया कि नलजल योजना अभी तक पंचायत को हैंडओवर नहीं की गई है, जिसके कारण अधूरे कार्यों के लिए ठेकेदार ही पूरी तरह जिम्मेदार है। नदी की झिरिया का दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण भीषण गर्मी के इस मौसम में देवहारा के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। पेयजल की कोई अन्य व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण गांव से दो किलोमीटर दूर स्थित कुकरा नदी जाने को मजबूर हैं। वर्तमान में कुकरा नदी भी पूरी तरह सूख चुकी है, जहां ग्रामीणों ने रेत खोदकर छोटी-छोटी झिरिया बनाई हैं। इन झिरिया में एकत्र होने वाले गंदे और दूषित पानी को ग्रामीण दो किलोमीटर पैदल चलकर अपने घरों तक लाते हैं। पानी के एक जगह ठहरे होने के कारण इसके स्वच्छ होने की कोई गारंटी नहीं है, जिससे गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। - ईएमएस / 07/05/2026