- किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के उचित उपयोग की दी जा रही जानकारी मधुबनी, (ईएमएस)। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर जिले के सभी प्रखंडों में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) मधुबनी एवं कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान पूरे खरीफ मौसम के दौरान पंचायत स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक संचालित किया जा रहा है। जिसमें कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक कर रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी सह-परियोजना निदेशक, आत्मा मधुबनी ललन कुमार चौधरी ने बताया कि किसानों द्वारा खेती में उर्वरकों के असंतुलित एवं अत्यधिक प्रयोग के कारण मृदा की उपज क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। साथ ही, उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार से प्राप्त निर्देश के आलोक में जिले भर में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है. मृदा की उर्वरता एवं फसल की - आवश्यकता के अनुसार करें उर्वरकों का प्रयोग जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को बताया जा रहा है कि संतुलित उर्वरक उपयोग का अर्थ केवल रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं, बल्कि फसलों की आवश्यकता, मिट्टी की उर्वरता की स्थिति तथा मौजूदा जलवायु परिस्थितियों के आधार पर सभी आवश्यक पोषक तत्वों का उचित अनुपात, उचित मात्रा, उचित समय एवं उचित विधि से उपयोग करना है। कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की जा रही है कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के विश्लेषण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण हो सके तथा कृषि उत्पादन की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने से फसल उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा उच्च उपज देने वाली किस्मों का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार, बेहतर फसल गुणवत्ता, फसलों की तनाव सहनशीलता में वृद्धि एवं मृदा स्वास्थ्य की स्थिरता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग से पर्यावरणीय जोखिमों में कमी आती है तथा किसानों की लागत घटने के साथ इनपुट उपयोग भी अधिक प्रभावी होता है। कृषि विभाग ने सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए संतुलित एवं न्यायोचित उर्वरक उपयोग को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं, ताकि टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि व्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। - ०७ मई/२०२६/ईएमएस