अंतर्राष्ट्रीय
07-May-2026


पेरिस (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बने समुद्री संकट के बीच अब यूरोप ने भी सक्रिय रणनीतिक कदम उठाया है। फ्रांस ने अपने परमाणु शक्ति से संचालित विमानवाहक युद्धपोतचार्ल्स डी गॉल को लाल सागर और अदन की खाड़ी की दिशा में रवाना कर दिया है। फ्रांसीसी सरकार ने साफ किया है कि यह कदम किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं, बल्कि समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की तैयारी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि युद्धपोत स्वेज नहर पार कर दक्षिणी लाल सागर की ओर बढ़ चुका है, ताकि जरूरत पड़ने पर होर्मुज क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा अभियान तेजी से शुरू किया जा सके। जानकारी के अनुसार फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम मिलकर 40 से अधिक देशों के साथ एक वैकल्पिक समुद्री सुरक्षा ढांचे पर काम कर रहे हैं। इस पहल को अमेरिकी अभियान से अलग बताया जा रहा है। फ्रांसीसी नेतृत्व का कहना है कि यह मिशन तभी लागू होगा जब क्षेत्र में स्थायी शांति और कूटनीतिक सहमति का माहौल बनेगा। हाल के दिनों में यूरोपीय व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों और तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे ने यूरोप को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने पर मजबूर किया है। माना जा रहा है कि फ्रांस का यह कदम ईरान के तट के पास शक्ति संतुलन का नया संकेत है और आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। सुबोध/०७-०५-२०२६