क्षेत्रीय
08-May-2026
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कांकेर (ईएमएस)। जिला में “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन बेमौसम बारिश ने संग्रहण कार्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। लगातार बदल रहे मौसम के कारण तेंदूपत्ता की हजारों गड्डियां भीग गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने लगी है। जानकारी के अनुसार, बस्तर अंचल में इन दिनों सुबह तेज धूप रहती है, जबकि शाम होते-होते आंधी और बारिश शुरू हो जाती है। पिछले तीन दिनों से जारी मौसम की इस आंखमिचौली का असर तेंदूपत्ता की तोड़ाई, खरीदी और भंडारण पर साफ दिखाई दे रहा है। तेज हवा और बारिश के कारण संग्रहण केंद्रों में सुखाने के लिए रखे गए तेंदूपत्ता के बंडल उड़कर टूट रहे हैं, वहीं कई बंडल पूरी तरह भीग गए हैं। नमी बढ़ने से उनमें दीमक लगने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम नवागांव के खरीदी केंद्र में लगभग 120 तेंदूपत्ता संग्राहक पंजीकृत हैं। यहां अब तक करीब 60 हजार तेंदूपत्ता की खरीदी की जा चुकी है। लेकिन बारिश के चलते केंद्र में रखे हजारों बंडल प्रभावित हो गए हैं। स्थानीय हितग्राहियों का कहना है कि नमी के कारण पत्तों की गुणवत्ता तेजी से खराब हो रही है। यदि समय रहते सुरक्षित भंडारण और संरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई, तो बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता खराब हो सकता है। वन विभाग और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तेंदूपत्ता को बारिश और नमी से बचाने की है, ताकि संग्राहकों और शासन दोनों को नुकसान से बचाया जा सके। - (ईएमएस)08 मई 2026