नई दिल्ली (ईएमएस)। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी राजनीति के भीतर चल रही खींचतान के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का एक सोशल मीडिया संदेश अब राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। एक तस्वीर में ममता बनर्जी और एम. के. स्टालिन दिखाई देते हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि निशाना कहीं न कहीं राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति पर साधा गया है। अखिलेश यादव ने अपने संदेश में लिखा, “हम वो नहीं हैं, जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें।” इस एक पंक्ति ने सियासी अटकलों को तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि यह संदेश उन दलों के लिए है, जिन्होंने चुनावी परिस्थितियों में सहयोगी दलों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह पोस्ट बेहद सोच-समझकर किया गया है। बंगाल चुनाव के दौरान कांग्रेस और तृणमूल के बीच बढ़ी तल्खी, उसके बाद ममता बनर्जी के समर्थन में अखिलेश का खुलकर सामने आना, अब इस संदेश को और अहम बना रहा है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अभी भी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। अगले विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश का यह संदेश साफ संकेत देता है कि दोस्ती, दूरी और दबाव—तीनों का खेल अब खुलकर शुरू हो चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विपक्षी एकता कायम रहेगी, या तस्वीरें साथ होंगी और रास्ते अलग? सुबोध/०८-०५-२०२६