क्षेत्रीय
10-May-2026
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- अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 434 लीटर स्तन दूध दान, 451 नवजात शिशुओं को मिला नया जीवन अहमदाबाद (ईएमएस)| भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार अंतिम पंक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मदर्स डे के पावन अवसर पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल की ‘मा वात्सल्य मिल्क बैंक’ मातृत्व, करुणा और मानवता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया के निरंतर प्रोत्साहन से यह मिल्क बैंक आज अनेक कमजोर और समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रही है। सिविल अस्पताल की ‘मा वात्सल्य’ मिल्क बैंक की प्रभारी डॉ. सुचेता मुंशी ने बताया कि, “मां का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत समान होता है। 28 अगस्त 2025 को 1200 बेड अस्पताल में शुरू हुई इस मिल्क बैंक में अब तक 2042 माताओं ने अपने बच्चों के साथ-साथ जरूरतमंद शिशुओं के लिए भी स्तन दूध दान किया है। बैंक में कुल 434 लीटर दूध संग्रहित हुआ, जिससे 451 नवजात शिशुओं को नया जीवन मिला है।” - प्रेरणादायी माताओं की कहानियां - कठिन परिस्थितियों में भी मातृत्व का अद्भुत समर्पण मंजुलाबेन के बच्चे को खून में गंभीर संक्रमण और आंतों में रुकावट की समस्या थी, जिसके कारण ऑपरेशन करना पड़ा। बच्चा 32 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। इस कठिन समय में भी मंजुला बेन ने 24 लीटर स्तन दूध दान कर अन्य नवजात शिशुओं की मदद की। कृष्णाबेन की बच्ची बेहद कम वजन और समय से पहले जन्मी थी। उसे लंबे समय तक विशेष उपचार की आवश्यकता रही और 40 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली। इस दौरान कृष्णाबेन ने भी 24 लीटर दूध दान कर मानवता की मिसाल पेश की। पुनिता बेन ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। दोनों बच्चे समय से पहले जन्मे और बेहद कमजोर थे। इसके बावजूद उन्होंने मातृत्व की अनूठी भावना दिखाते हुए पहले 40 दिनों में अपने बच्चों के साथ 13 लीटर स्तन दूध दान किया। आज उनके दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। पूजा पटेल के बच्चे का जन्म मात्र 815 ग्राम वजन के साथ समय से पहले हुआ था। बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती कर सर्फेक्टेंट इंजेक्शन और 12 दिनों तक सीपीएपी सपोर्ट दिया गया। इस दौरान पूजा बेन लगातार मिल्क बैंक में दूध निकालकर बच्चे को पोषण देती रहीं। साथ ही उन्होंने प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक कंगारू मदर केयर (केएमसी) भी प्रदान की, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। लंबी और चुनौतीपूर्ण एनआईसीयू उपचार प्रक्रिया के बाद 44वें दिन बच्चे का वजन 1.25 किलोग्राम होने पर उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दी गई। मदर्स डे के अवसर पर सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने सभी दाता माताओं को नमन करते हुए कहा कि यह सेवा केवल स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि मानवता का जीवंत उदाहरण है। सरकार के प्रयासों और समाज की संवेदनशीलता के कारण आज सैकड़ों बच्चे स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बी. जे. मेडिकल कॉलेज पूर्व छात्र संघ तथा पंड्या फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित यह मिल्क बैंक विशेष रूप से उन नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, जिनकी माताएं बीमारी या अन्य कारणों से स्तनपान कराने में असमर्थ होती हैं। मां के दूध से नवजात शिशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास को मजबूती मिलती है। - 10 मई