:: पंजाब के बाद सर्वाधिक उपार्जन की ओर बढ़ते कदम, अब तक 63 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी :: भोपाल/इन्दौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक नया इतिहास रचा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और सूक्ष्म प्रबंधन का परिणाम है कि प्रदेश ने गेहूँ उपार्जन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब तक राज्य में देश में सर्वाधिक 10 लाख से अधिक किसानों से गेहूँ खरीदा जा चुका है। प्रदेश अब पंजाब के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा गेहूँ उपार्जन केंद्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। आंकड़ों की जुबानी देखें तो उपार्जन की रफ़्तार चौंकाने वाली है। शनिवार, 9 मई तक प्रदेश में 63 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ की खरीदी संपन्न हो चुकी है। उपार्जन केंद्रों पर हर दिन लगभग 5 लाख मीट्रिक टन अनाज की आवक हो रही है। इस पारदर्शी व्यवस्था के चलते किसानों को अब तक 11,623.43 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके खातों में किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। :: मुख्यमंत्री की ग्राउंड जीरो पर सक्रियता :: इस वृहद अभियान की सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सजगता को जाता है। वे स्वयं खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने न केवल तौल कांटों और बारदानों की उपलब्धता जांची, बल्कि तपती धूप में अपनी उपज लेकर आए किसानों से संवाद कर सुविधाओं की जमीनी हकीकत भी जानी। उनके कड़े निर्देशों के बाद समूचा प्रशासनिक अमला और मंत्रीगण भी केंद्रों पर मुस्तैद हैं। :: लक्ष्य में वृद्धि, बढ़ता विश्वास :; राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों को देखते हुए केंद्र सरकार ने उपार्जन लक्ष्य को 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। 23 मई तक चलने वाले इस अभियान के लिए अब तक करीब 15 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है। उपार्जन की राष्ट्रीय तस्वीर (तुलनात्मक चार्ट) -------------------------------------------------------------------------- राज्य लाभान्वित किसान (लाख में) अभियान की अंतिम तिथि -------------------------------------------------------------------------- मध्यप्रदेश 10.00 23 मई 2026 हरियाणा 9.10 15 मई 2026 पंजाब 7.50 10 मई 2026 उत्तर प्रदेश 2.00 15 जून 2026 -------------------------------------------------------------------------- मध्यप्रदेश में हो रहा यह रिकॉर्ड उपार्जन न केवल राज्य की कृषि प्रधानता को सिद्ध करता है, बल्कि यह किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और सुदृढ़ प्रशासनिक मशीनरी का भी परिचायक है। प्रकाश/10 मई 2026