राष्ट्रीय
11-May-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया है, जिसमें दावा किया गया था कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात फुजैराह बंदरगाह के जरिए अमीरात से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए किसी समझौते पर काम कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कहानियों का कोई आधार नहीं है। यह खंडन पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और यूएई पर हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों के कारण हवाई यातायात में व्यवधान की खबरों के बीच आया है। विदेश मंत्रालय की तथ्य-जांच इकाई ने एक पोस्ट में नागरिकों से इसतरह के झूठे और निराधार दावों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। विदेश मंत्रालय ने पोस्ट में साफ तौर पर लिखा था, फर्जी खबर! ऐसी किसी भी खबर का कोई आधार नहीं है। किसी भी प्रकार की निकासी की योजना नहीं बनाई जा रही है। कृपया इसतरह के झूठे और निराधार दावों के प्रति सतर्क रहें। मंत्रालय ने खबर के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अपनी तरह की पहली संधि के तहत, हवाई यातायात में किसी भी तरह की समस्या होने पर संयुक्त अरब अमीरात में फंसे भारतीयों को जहाज द्वारा निकाला जाएगा। इन रिपोर्ट्स ने इस कथित समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सप्ताह के अंत में यूरोप जाते समय संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले नियोजित ठहराव से भी जोड़ा था। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध गहराता जा रहा है। ईरान ने हाल ही में पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से ईरान युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तुरंत पूरी तरह अस्वीकार्य! बताकर खारिज कर दिया। यह फारस की खाड़ी में गतिरोध को सुलझाने के प्रयासों के लिए एक और बड़ा झटका है, जिसके कारण जहाजरानी ठप हो गई है और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरानी मीडिया ने बताया था कि तेहरान ने इस प्रस्ताव को आत्मसमर्पण के समान बताकर खारिज कर दिया और इसके बजाय अमेरिका द्वारा युद्ध क्षतिपूर्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता, प्रतिबंधों की समाप्ति और जब्त की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई की मांग की। अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम की तब फिर परीक्षा हुई जब कतर और संयुक्त अरब अमीरात के तट पर एक जहाज पर ड्रोन से मामूली आग लग गई और कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश की सूचना दी। आशीष दुबे / 11 मई 2026