राष्ट्रीय
11-May-2026


* वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक और बायोमेट्रिक फ्रॉड से बढ़ा खतरा, गुजरात हाईकोर्ट ने भी जताई चिंता अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में साइबर अपराध के मामले लगातार भयावह रूप लेते जा रहे हैं। राज्य में हर घंटे औसतन 21 और प्रतिदिन करीब 500 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हो रही हैं। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जहां लोगों के लिए सुविधाओं का नया माध्यम बन रहे हैं, वहीं अब यही तकनीक साइबर अपराधियों के लिए सबसे खतरनाक हथियार साबित हो रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने भी अदालतों में एआई के सीमित उपयोग की नीति लागू करने का फैसला लिया है। * ‘एआई वॉइस स्कैम’ बना नया खतरा देशभर में इन दिनों ‘एआई वॉइस स्कैम’ तेजी से फैल रहा है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में 83 प्रतिशत लोग एआई आधारित वॉइस स्कैम का शिकार बन रहे हैं, जबकि केवल 17 प्रतिशत लोग ही ऐसी ठगी से बच पा रहे हैं। साइबर ठग अब एआई तकनीक की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज हूबहू कॉपी कर लेते हैं और खुद को रिश्तेदार, पुलिस अधिकारी या बैंक कर्मचारी बताकर लोगों को डराते या लालच देकर ठगी कर रहे हैं। * युवा और बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर रिपोर्ट के अनुसार 47 प्रतिशत युवा और बच्चे डीपफेक तथा वॉइस क्लोनिंग के जाल में फंस रहे हैं। वहीं सीनियर सिटीजन्स में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अपराधी सोशल मीडिया से फोटो और वीडियो हासिल कर नकली प्रोफाइल तैयार करते हैं और फिर परिचित बनकर लोगों से पैसे ऐंठते हैं। * आधार लिंक मोबाइल नंबर भी बदल रहे साइबर ठग साइबर अपराधी अब एआई का इस्तेमाल कर आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर तक बदलने लगे हैं। इतना ही नहीं, एआई जनित नकली वीडियो और ‘आई ब्लिंक एनिमेशन’ तकनीक के जरिए बैंकिंग सिस्टम के बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी चकमा दिया जा रहा है। इसके चलते लोगों के बैंक खाते कुछ ही मिनटों में खाली हो रहे हैं। * एक व्यक्ति, कई आवाजें गुजरात साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, एआई सॉफ्टवेयर की मदद से अपराधी अपनी आवाज को कई रूपों में बदल लेते हैं। कभी महिला की आवाज, कभी पुलिस अधिकारी तो कभी बैंक कर्मचारी बनकर लोगों को फोन किया जाता है। कई मामलों में लोगों को गिरफ्तारी, केवाईसी बंद होने या बैंक खाता फ्रीज होने का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर करवाई जाती है। * विदेशों से संचालित हो रहा साइबर गैंग जांच एजेंसियों के मुताबिक साइबर अपराध का बड़ा नेटवर्क कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे देशों से संचालित हो रहा है। इन गिरोहों के मुख्य सरगना विदेशों में सुरक्षित बैठे रहते हैं, जबकि भारत में पैसों के लेन-देन में मदद करने वाले स्थानीय एजेंट पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। * सोशल मीडिया पर ज्यादा जानकारी साझा करना पड़ रहा भारी गुजरात साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों को सोशल मीडिया पर निजी और पारिवारिक जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग ओपन प्रोफाइल से तस्वीरें और जानकारियां जुटाकर डीपफेक तकनीक से नकली अकाउंट बनाते हैं और फिर रिश्तेदारों तथा परिचितों को ठगी का निशाना बनाते हैं। * सावधानी ही बचाव विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान कॉल, वीडियो कॉल या किसी भी संदिग्ध लिंक पर तुरंत भरोसा न करें। बैंक, पुलिस या सरकारी एजेंसी के नाम पर मांगी जा रही निजी जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। सतीश/11 मई