राज्य
11-May-2026


:: प्रचार पर पानी फेरती जनता : 51 कार्यक्रमों और मुफ्त हेलमेट के बाद भी सड़कों पर वही अराजकता और रेंगती चाल :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर को स्मार्ट बनाने के दावों के बीच शहर की जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसे नियमों से ज्यादा अपनी मर्जी प्यारी है। पुलिस कमिश्नरेट द्वारा 26 अप्रैल से 10 मई तक चलाए गए 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा अभियान का समापन तो हो गया, लेकिन सड़कों की तस्वीर नहीं बदली। पुलिस ने 51 कार्यक्रमों के जरिए लाखों लोगों को जागरूक करने का दावा किया, पर कड़वी हकीकत यह है कि इंदौर की जनता नियमों को मानने के बजाय उन्हें तोड़ने में ही गर्व महसूस कर रही है। अफसरों के समझाने और मुफ्त हेलमेट बाँटने के बाद भी सड़कों पर अनुशासन का अकाल साफ नजर आ रहा है। अभियान के दौरान पुलिस ने चालान काटने के बजाय गाँधीगीरी दिखाई। स्कूलों-कॉलेजों में जाकर प्रेजेंटेशन दिए गए, नुक्कड़ नाटक हुए और डिजिटल रथों से सुरक्षा के गीत भी सुनाए गए। लेकिन जैसे ही पुलिस का कैमरा या जवान ओझल होता, जनता की असली फितरत सामने आ जाती। रेड लाइट जंप करना, रोंग साइड गाड़ी घुसाना और सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाना आज भी इंदौर की सड़कों का सामान्य दृश्य है। ऐसा लगता है कि जनता ने यह ठान लिया है कि पुलिस चाहे जितनी पाठशाला लगा ले, वे सुधरने वाले नहीं हैं। :: मुफ्त की रेवड़ी तो ली, पर जिम्मेदारी भूली जनता :: अभियान के नाम पर करीब 4220 हेलमेट मुफ्त बाँटे गए। हेलमेट लेने के लिए तो लंबी कतारें लगीं और जनता ने उत्साह दिखाया, लेकिन वही हेलमेट अब गाड़ियों के हैंडल पर लटके या घरों के कोनों में धूल खाते नजर आ रहे हैं। पुलिस कमिश्नर और अन्य बड़े अधिकारियों ने खुद सड़कों पर उतरकर वाहन चालकों से मिन्नतें कीं, पर जनता ने इसे केवल एक सरकारी आयोजन मानकर अनसुना कर दिया। ट्रैफिक प्रहरियों की मौजूदगी के बावजूद लोग उनसे उलझते और नियमों को ताक पर रखते दिखाई दिए। :: हेल्पलाइन और दावों की खोखली ज़मीन :: यातायात पुलिस अपनी व्हाट्सएप हेल्पलाइन (7049107620) पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण का पीठ थपथपा रही है, लेकिन सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाएँ और रेंगता ट्रैफिक कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। जब तक जनता में कानून का खौफ नहीं होगा, तब तक ये जागरूकता अभियान केवल फोटो खिंचवाने और आंकड़े जुटाने तक सीमित रहेंगे। सच्चाई यह है कि इंदौर की सड़कों पर अब अनुशासन केवल कागजों में सिमट कर रह गया है। 15 दिनों के भारी-भरकम प्रचार के बाद भी अगर सोमवार की सुबह शहर फिर उसी जाम और अराजकता से जूझ रहा है, तो समझ लेना चाहिए कि जनता को जागरूक करना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा साबित हो रहा है। प्रशासन के नरम रवैये ने जनता की लापरवाही को और बढ़ावा दिया है, जिसका खामियाजा सुरक्षित सफर की उम्मीद रखने वाले मासूम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। प्रकाश/11 मई 2026