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12-May-2026


- डिजिटल और रचनात्मक क्षेत्र बन रहे विकास के नए इंजन नई दिल्ली (ईएमएस)। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) के एक अ‎धिकारी ने भारत की तेजी से बढ़ती रचनात्मक अर्थव्यवस्था के भविष्य के विकास को बढ़ावा देने के लिए इसके मापन और औपचारीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल और रचनात्मक क्षेत्र अब कृषि और विनिर्माण के बराबर आर्थिक वृद्धि के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सेवा क्षेत्र का अभिन्न अंग बताया, जिसके लिए समर्पित मापन प्रणाली जरूरी है। इस बढ़ते महत्व को देखते हुए, मंत्रालय इस महत्वपूर्ण खंड को मापने के लिए एक इंडेक्स ऑफ सर्विस प्रोडक्शन बनाने की कवायद कर रहा है। गर्ग ने स्पष्ट कहा, हमें जो हम करते हैं, उसके मापन की जरूरत है। उन्होंने रचनात्मकता को 2025 में नॉलेज इकॉनमी पर गठित विशेषज्ञों के समूह से जोड़ा, जहां अनुसंधान, विकास, सॉफ्टवेयर और कलात्मक/मनोरंजन जैसे बौद्धिक संपदा (आईपी) महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूपीओ) का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अमू्र्त वृद्धि के मामले में भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में 6.6 प्रतिशत की सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में भी भारत 2015 के 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद आईपी फाइलिंग में अभी भी पीछे है। गर्ग ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान आंकड़े हमारी अर्थव्यवस्था के वास्तविक पैमाने से काफी कम हैं। सतीश मोरे/12मई ---