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12-May-2026


- सरकारी अस्पतालों में भी तीन गुना बढ़ा खर्च, ग्रामीण मरीजों पर भारी पड़ा इलाज का बोझ नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसएसओ) की स्वास्थ्य पर घरेलू सामाजिक खपत पर आधारित एक ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट ने चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। बीते तीन दशकों में देश के निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च लगभग दस गुना तक बढ़ गया है, जो 1995-96 में 4,822 रुपये से बढ़कर 2025 तक 50,508 रुपये हो गया है। यह भारी वृद्धि न केवल निजी बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी देखी गई है, जहां इलाज का खर्च 2,138 रुपये से बढ़कर 6,631 रुपये हो गया है, जो तीन गुना इजाफे को दर्शाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, निजी और सरकारी अस्पतालों के बीच इलाज के खर्च का अंतर अब काफी बढ़ गया है; जो पहले दोगुना था, अब मरीजों को निजी अस्पतालों में सरकारी के मुकाबले सात गुना से अधिक पैसा अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया गया है। इन तीन दशकों में पहली बार सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले ग्रामीण मरीजों का अपनी जेब से होने वाला खर्च शहरी मरीजों से अधिक पाया गया है। विशेषकर, ग्रामीण परिवारों में सबसे निचले 20 प्रतिशत आय वर्ग में अस्पताल में भर्ती होने की लागत शहरी समकक्षों से ज्यादा है। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि राज्यों में यह खर्च अलग-अलग हो रहा है, जहां सबसे अधिक और सबसे कम खर्च वाले राज्यों के बीच लगभग तीन गुना का अंतर दर्ज किया गया है। सतीश मोरे/12मई ---