क्षेत्रीय
12-May-2026
...


बिलासपुर (ईएमएस)। आधुनिक हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए बिलासपुर में 70 वर्षीय मरीज परमेश्वर श्रीवास का सफल रु्र्र (लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज) क्लोजर किया गया। मरीज एट्रियल फाइब्रिलेशन एवं बार-बार होने वाले ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित थे और उन्हें अब तक तीन बार स्ट्रोक आ चुका था। उनका उपचार वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एम. पी. समल के मार्गदर्शन में किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति अचानक रुक जाती है या रक्त वाहिका फट जाती है। यदि यह स्थिति बार-बार उत्पन्न हो, तो उसे रेकरेंट स्ट्रोक कहा जाता है, जो मरीज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि कई मामलों में हृदय की धडक़न अनियमित होने लगती है, जिसे एट्रियल फाइब्रिलेशन कहा जाता है। इस स्थिति में हृदय के भीतर खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। ऐसे मरीजों के लिए लॉ क्लोजर एक अत्याधुनिक एवं प्रभावी उपचार माना जाता है। इस प्रक्रिया में हृदय के लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज हिस्से को विशेष डिवाइस के माध्यम से बंद कर दिया जाता है, जिससे खून के थक्के बनने की संभावना कम हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि यह प्रक्रिया बिना ओपन हार्ट सर्जरी के, केवल कैथेटर तकनीक से की जाती है। डॉ. एम. पी. समल, डॉ. आकाश अग्रवाल एवं उनकी टीम ने अत्यंत कुशलता के साथ यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है तथा उन्हें बार-बार स्ट्रोक होने के खतरे से बड़ी राहत मिली है। यह सफलता बिलासपुर में उन्नत हृदय चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। - 12 मई 2026