देखना होगा कि अन्नाद्रमुक के विधायकों को क्या मिलता है चेन्नई (ईएमएस)। तमिलनाडु की राजनीति में विश्वास मत के बाद नया सियासी घमासान छिड़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (डीएमके) के प्रमुख एमके स्टालिन ने तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार पर गंदी राजनीति (डर्टी पॉलिटिक्स) करने का गंभीर आरोप लगा दिया है। डीएमके नेता स्टालिन ने कहा कि डीएमके ने पहले ही यह रुख अपना लिया था कि वह टीवीके सरकार के गठन या उसके बने रहने में कोई बाधा नहीं डालेगी। इसी के तहत डीएमके विधायकों ने विश्वास मत का बहिष्कार किया और सदन से वॉकआउट कर गए। स्टालिन ने बताया कि विधानसभा में उनके गठबंधन सहयोगियों प्रेमलता विजयकांत, प्रोफेसर जवाहरुल्लाह, थमिमुन अंसारी और नित्यानंदन ने भी सदन से वॉकआउट कर उनका साथ दिया। वहीं, सीपीआई, सीपीआई (एम), आईयूएमएल और वीसीके जैसे सहयोगी दलों ने राष्ट्रपति शासन की संभावना को रोकने के लिए सरकार के पक्ष में मतदान किया, जिसके लिए स्टालिन ने दोनों निर्णयों का सम्मान व्यक्त किया। हालांकि, स्टालिन ने आरोप लगाया कि अब टीवीके सरकार उन लोगों का भरोसा तोड़ रही है, जिन्होंने सरकार बनने की मदद की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में सत्ताधारी दल की गतिविधियों और सहयोगी दलों के बयानों से साफ हो गया है कि सरकार स्वच्छ राजनीति के अपने वादे से भटक चुकी है। डीएमके प्रमुख ने टीवीके पर अन्नाद्रमुक के अंदरूनी विवाद का फायदा उठाकर उसके विधायकों को अपने पक्ष में करने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग क्लीन पॉलिटिक्स का नारा देकर सत्ता में आए थे, वे अब डर्टी पॉलिटिक्स में शामिल हुए हैं। स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय को संबोधित कर कहा कि तमिलनाडु की जनता सरकार की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है और यह भी देख रही है कि अन्नाद्रमुक से जुड़े विधायकों को किस तरह का रिटर्न गिफ्ट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएमके अपनी विचारधारा से पीछे नहीं हटेगी और राज्य में एक मजबूत व रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाती रहेगी। उनके इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। आशीष दुबे / 13 मई 2026