ज़रा हटके
14-May-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। सूरज की बढ़ती सक्रियता अंतरिक्ष में मौजूद पुराने कचरे को तेजी से पृथ्वी की ओर धकेल रही है। अंतरिक्ष में वर्षों से जमा पुराने सैटेलाइट और मलबा अब धरती के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। इसरो के वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया रिसर्च में खुलासा किया है कि जब सूरज अपने 11 वर्षीय सौर चक्र के चरम पर पहुंचता है, तब लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद निष्क्रिय सैटेलाइट और मलबे के टुकड़े तेजी से अपनी ऊंचाई खोने लगते हैं। यह पहली बार है जब सौर गतिविधि और अंतरिक्ष मलबे के धरती की ओर लौटने की गति के बीच सीधा संबंध सामने आया है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और इसरो की स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में पाया कि सूरज की बढ़ती ऊर्जा पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल पर गहरा असर डालती है। जब सौर गतिविधि अपने अधिकतम स्तर के करीब पहुंचती है, तो पृथ्वी के ऊपरी हिस्से यानी थर्मोस्फीयर का तापमान बढ़ जाता है। सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें और चार्ज्ड कण इस परत को गर्म कर देते हैं, जिससे यह फैलने लगती है और उसका घनत्व बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए घनत्व का सीधा असर लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट और अंतरिक्ष मलबे पर पड़ता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जब ये वस्तुएं घनी वायुमंडलीय परत से गुजरती हैं, तो उन पर हवा का अवरोध यानी ड्रैग बढ़ जाता है। इससे उनकी रफ्तार धीमी होने लगती है और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उन्हें तेजी से नीचे खींचने लगता है। सक्रिय सैटेलाइट तो अपने ईंधन की मदद से दोबारा ऊंचाई हासिल कर लेते हैं, लेकिन निष्क्रिय सैटेलाइट और पुराना मलबा धीरे-धीरे धरती की ओर गिरने लगता है। इस रिसर्च की मुख्य लेखिका आयशा एम अशरफ ने बताया कि सौर गतिविधि एक खास स्तर पार करते ही सैटेलाइट्स की ऊंचाई कम होने की प्रक्रिया अचानक तेज हो जाती है। यह स्थिति खासतौर पर उन पुराने सैटेलाइट्स के लिए खतरनाक है जिन्हें अब नियंत्रित नहीं किया जा सकता। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक में छोड़े गए अंतरिक्ष मलबे के 17 टुकड़ों का विश्लेषण किया। इनकी निगरानी पिछले 36 वर्षों से की जा रही थी। ये टुकड़े 600 से 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे थे। शोध में पाया गया कि सौर चक्र 22 से 24 के दौरान इनकी गति और ऊंचाई में बड़ा बदलाव आया। सुदामा/ईएमएस 14 मई 2026