राज्य
14-May-2026


पटना, (ईएमएस)। बिहार में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को पिछले चार महीनों से भुगतान नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। गरीब मरीजों को कैशलेस इलाज देने वाले कई निजी और धर्मार्थ अस्पतालों ने दावा किया है कि जनवरी से उनके करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं, जिससे रोजमर्रा के संचालन पर असर पड़ रहा है। योजना के नियमों के अनुसार, यदि किसी बिल पर कोई आपत्ति नहीं हो तो उसका भुगतान 15 दिनों के भीतर कर दिया जाना चाहिए। लेकिन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महीनों से भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों के वेतन, दवाइयों की खरीद, उपकरणों के रखरखाव और अन्य खर्चों को संभालना मुश्किल हो गया है। ज्ञात हो कि आयुष्मान भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़ी राहत देती है। ऐसे में समय पर अस्पतालों को भुगतान होने से गरीबों के इलाज में और मदद मिलेगी। उधर स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव और बिहार में आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशांक शेखर सिन्हा ने भुगतान में देरी की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि मार्च से बिलों के निपटारे में बाधा आई थी, लेकिन अगले कुछ दिनों में भुगतान प्रक्रिया फिर शुरू कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि बिहार में आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 1,298 अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जिनमें 434 सरकारी और 864 निजी अस्पताल शामिल हैं। संतोष झा- १४ मई/२०२६/ईएमएस