कांकेर(ईएमएस)। जिले के नारायणपुर सीमा से लगा ग्राम पंचायत सितरम अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सुशासन तिहार के तहत आयोजित विशेष शिविर में जिला प्रशासन की टीम सीधे दुर्गम रास्तों से होकर ग्रामीणों के बीच पहुंची, जिससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने लगभग 6 से 7 किलोमीटर के पथरीले और कच्चे रास्ते को तय कर गांव पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया और अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। गांव के विशाल कुसुम वृक्ष के नीचे आयोजित चौपाल में कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने परलकोट के अमर शहीद गैंद सिंह स्मारक परिसर में सामुदायिक भवन, घोटुल भवन तथा क्षेत्र की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर के जीर्णोद्धार की तत्काल स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहा, जिसके कारण विकास की गति बाधित रही, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हर पात्र हितग्राही को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल जाता, तब तक प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस शिविर में 14 आधारभूत अधोसंरचना योजनाओं और 31 व्यक्तिमूलक योजनाओं के शत-प्रतिशत संतृप्तिकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत राशन कार्ड, पहचान पत्र, आयुष्मान कार्ड, जॉब कार्ड और वन अधिकार पत्र जैसे दस्तावेज मौके पर ही बनाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत सितरम के सरपंच गणेश नायक ने चौपाल में कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं, जिनमें राजस्व एवं वन भूमि सीमांकन की समस्या प्रमुख रही। उन्होंने कुछ वन क्षेत्रों को नारायणपुर से कांकेर जिले में शामिल करने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर जल्द समाधान के निर्देश दिए। इसके अलावा सरपंच ने शाला भवन, छात्रावास, देवगुड़ी निर्माण, सामुदायिक भवन, स्वागत द्वार, हाई मास्ट सोलर लाइट और सीसी सड़क निर्माण जैसी लगभग 10 मांगें भी रखीं। भौगोलिक रूप से दो नदियों के बीच बसे होने के कारण सितरम गांव हर वर्ष बारिश के दौरान 3 से 4 महीने तक टापू जैसा बन जाता है, जिससे संपर्क पूरी तरह कट जाता है। यही स्थिति पहले माओवादियों के प्रभाव का कारण बनी थी। ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय तक यह इलाका नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों में से एक रहा, जिसके चलते विकास कार्य बाधित रहे। प्रशासनिक दावों के अनुसार, अब सुरक्षा बलों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज हो गए हैं। शिविर में पखांजूर एसडीएम मनीष देव साहू, कोयलीबेड़ा जनपद सीईओ, पुलिस बल और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सितरम पंचायत और उसके चार आश्रित ग्राम—राजामुंडा, शेरमुंडा, छिंदपदर और कोंगे—में कुल 254 परिवार रहते हैं, जिनकी जनसंख्या 1169 है। यहां 121 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हैं, जिनमें से 8 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 262 ग्रामीणों के पास मनरेगा जॉब कार्ड उपलब्ध है। ईएमएस(राकेश गुप्ता)14 मई 2026