इन्दौर (ईएमएस) अपर सत्र न्यायाधीश सुनील अहिरवार की कोर्ट ने हत्या के एक प्रकरण की सुनवाई करते तीनों आरोपियों को गवाहों के विरोधाभास, कमजोर विवेचना और संदेह का लाभ देते बरी कर दिया, प्रकरण में अभियोजन दोष साबित करने में असफल रहा। वर्ष 2022 के इस बहुचर्चित हत्याकांड प्रकरण की कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 12 अक्टूबर 2022 को पारिवारिक विवाद के चलते अब्दुल हमीद की डंडों से पीट पीटकर हत्या कर दी थी, जबकि उसकी पत्नी अनीसा को पहली मंजिल से नीचे फेंककर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। मामले में पुलिस ने आरोपी अब्दुल मजीद उर्फ मज्जू, उसकी पत्नी गुलनाज उर्फ गुलफ्शा और नसीम बी के खिलाफ धारा 302, 307 और 34 आईपीसी के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना उपरांत चालान कोर्ट में पेश किया। जहां सुनवाई दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता आशीष एस. शर्मा और अधिवक्ता भाग्यश्री ने पैरवी करते अदालत के समक्ष दलील दी कि मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य बेहद कमजोर हैं और गवाहों के कथनों में गंभीर विरोधाभास मौजूद हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पारिवारिक और संपत्ति विवाद के चलते आरोपियों को झूठा फंसाया गया। सुनवाई दौरान कोर्ट ने माना कि यह मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई, बल्कि यह हत्या जनित घटना थी, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं कर सके कि हत्या आरोपियों ने ही की थी। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। कुछ गवाहों ने घटना के संबंध में अलग-अलग तथ्य बताए, जबकि कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों की पुष्टि न्यायालय में स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी। जिसके चलते अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ गई ऐसे हालात में आरोपियों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा। आनंद पुरोहित/ 14 मई 2029