राज्य
14-May-2026


- पत्नी बनीं जमानतदार, समर्थकों में भारी उत्साह रांची (ईएमएस)। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम लगभग दो साल तक जेल में रहने के बाद गुरुवार को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से बाहर आ गए। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलते हुए सोमवार को जमानत प्रदान की गई थी। हालांकि, तकनीकी कारणों और जमानत आदेश समय पर अपलोड न होने की वजह से वे मंगलवार को रिहा नहीं हो सके थे। आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद गुरुवार को बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। पूर्व मंत्री के साथ ही उनके निजी सहायक (पीए) संजीव लाल को भी शीर्ष अदालत से जमानत मिल गई है। जेल के बाहर आलमगीर आलम का स्वागत करने के लिए उनकी पत्नी और पाकुड़ विधायक निशात आलम सहित भारी संख्या में समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आलमगीर आलम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और जांच के दौरान उनके पास से किसी प्रकार की नकदी या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। इसके साथ ही उनकी गिरती सेहत और बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर रिहाई की मांग की गई थी। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी। आलमगीर आलम की जमानतदार उनकी पत्नी निशात आलम बनी हैं। जेल से बाहर आने के बाद समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की, वहीं पूर्व मंत्री सीधे अपने आवास के लिए रवाना हो गए। उनके बाहर आने से राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रामयश/ईएमएस 14 मई 2026