व्यापार
14-May-2026
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-मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार को बड़ी राहत की उम्मीद -केंद्र को इस बार पिछले साल से भी अधिक सरप्लस मिलने की संभावना -सरकारी बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे से बढ़ी उम्मीदें नई दिल्ली,(ईएमएस)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस वर्ष केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है। मिडिल ईस्ट संकट और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह रकम सरकार के लिए बड़ा वित्तीय सहारा साबित हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई बोर्ड की इस महीने होने वाली बैठक में सरकार को दिए जाने वाले डिविडेंड और सरप्लस ट्रांसफर की अंतिम राशि पर फैसला लिया जाएगा। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था, जो उससे पिछले वर्ष के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक था। अब संभावना जताई जा रही है कि इस बार यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। आरबीआई द्वारा सरकार को दिया जाने वाला सरप्लस “इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क” के तहत तय किया जाता है। इस व्यवस्था के अनुसार रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट में कंटीजेंट रिस्क बफर (सीआरबी) को 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बनाए रखना होता है। इसी आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि बैंक सरकार को कितनी अतिरिक्त राशि ट्रांसफर कर सकता है। केंद्र सरकार के बजट दस्तावेजों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को आरबीआई, सरकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड और सरप्लस के रूप में मिलने की उम्मीद है। यह चालू वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि वास्तविक राशि बजट अनुमान से ज्यादा हो सकती है। इस उम्मीद की बड़ी वजह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मजबूत प्रदर्शन है। सरकारी बैंकों ने वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। बेहतर एसेट क्वालिटी, कर्ज वितरण में तेजी और बढ़ती आय के चलते इन बैंकों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट 11.1 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह लगातार चौथा वर्ष है जब सरकारी बैंकों ने सामूहिक रूप से लाभ दर्ज किया है। बजट अनुमान के मुताबिक, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य निवेशों से सरकार को 75 हजार करोड़ रुपये डिविडेंड मिलने की संभावना है। वहीं कुल नॉन-टैक्स रेवेन्यू 6.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरबीआई इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड देता है तो इससे सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक दबावों से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी। हिदायत/ईएमएस 14मई26