क्षेत्रीय
16-May-2026
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झाँसी (ईएमएस ) इस भीषण गर्मी के कारण रेलवे के ड्राइवर और गार्ड गर्मी की वजह से बीमार हो रहे हैं। रेलवे के लोको पायलट को बाहर के तापमान से लगभग 10 डिग्री अधिक तापमान में झूलसना पड़ रहा है। इंजन के केबिन का तापमान बाहर के तापमान से काफी अधिक हो जाता है। इसी तरह गार्ड के डिब्बे का भी तापमान बाहर के तापमान से अधिक होता है इसी कारण लोको पायलट और गार्ड बीमारियों का शिकार बन रहे हैं।इस गर्मी में लोको पायलट को लगभग 8 से 12 घंटे इंजन में रहना पड़ता है और गार्ड को भी लगभग इतना ही समय अपने केबिन में गुजरना पड़ता है।कई चालक नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक गर्म हवाओं के थपेड़े और अधिक तापमान की वजह से इंजन बेहद गर्म हो जाते हैं मशीन चालू होने से इंजन के अंदर का तापमान काफी बढ़ जाता है विद्युत और डीजल इंजन की बॉडी लोहे की होने से इंजन के अंदर में तापमान काफी बढ़ जाता है यह कई बार 50 डिग्री को भी पार कर जाता है। कई इंजन में ऐ सी लगे हैं लेकिन अधिकांश में अब तक नहीं लग सके इन चालकों के मुताबिक जिनमे ऐ सी लगे हैं वह भी गर्म हवा दे रहे हैं सर्वे में भी इंजन का तापमान काफी बड़ा हुआ पाया गया है। और भीषण गर्मी में इंजन भट्ठीयो में बदल जाते हैं इंजन का तापमान जाँचने के लिए गत दिनों देश में एक सर्वे भी हुआ था इंजन में लगी मशीनों को ठंडा करने के लिए वैक्यूम लगे होते हैं इससे मशीन का तापमान नियंत्रित हो जाता है लेकिन चालकों के शरीर गर्म ही रह जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार भी लोको पायलट को हाई बीपी शुगर और बहरेपन की बीमारी आम है। युवा लोको पायलट भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं इंजन में टॉयलेट बाथरूम की सुविधा भी नहीं है ऐसे में महिला लोको पायलट को बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। एक लोको पायलट ने बताया कि इंजन में हमारी सीट स्टूल की तरह है आमतौर पर 10 से 12 घंटे तक इस पर बैठना पड़ता है गर्मी और पसीने के कारण कई कर्मचारियों को त्वचा संबंधित रोग भी हो रहे हैं बाहर के तापमान से 5 से 10 डिग्री अधिक तापमान पर हमें इंजन में बैठना पड़ता है। आरके दुबे संरक्षक ऑल इंडिया लोगो रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के अनुसार बाहरी तापमान व इंजन की गर्मी से लोको पायलट की हालत खराब हो जाती है संगठन लगातार इस मुद्दे को उठा रही है। गर्मी में इंजन किसी बॉयलर से कम नहीं होते हैं बाहर के तापमान के साथ इंजन की गर्मी से लोको पायलट केबिन का तापमान 8 से 10 डिग्री ज्यादा ही होता है तापमान ही नहीं इंजन में लगी छह मोटर के चलने की भारी आवाज और गड़गड़ाहट भी लोको पायलट की परीक्षा लेती है। इन्हीं सब कारणों से गर्मी से त्रस्त लोको पायलट व सहायक पायलट ने ऐसी लोको शेड के सामने मुंडी गरम प्रदर्शन किया। व्यवस्था को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ऑल इंडिया लोगो रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस धरना प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारीयों का कहना था कि भारतीय रेल के 15000 इंजन है इनमें से कुछ नए इंजन को छोड़कर अधिकांश में आज भी ऐसी नहीं है इंजन केविन का तापमान 50 से 55 डिग्री हो जाता है जो की लोको पायलट के लिए काफी नुकसानदायक है इस राष्ट्रव्यापी मुंडी गरम प्रदर्शन में मंडल की सभी शाखाओ के लोगों रनिंग स्टाफ ने भाग लिया और वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता को ज्ञापन सोपा इस आंदोलन के दौरान इनकी मांगे रही की सभी लोको केबिन ए सी हों, केबिन में ही सिग्नल संकेत देखने की व्यवस्था की जाए टूलबॉक्स व जीपीएस आधारित आरटीएस के साथ एफएसडी लगाया जाए, आरामदायक सीट लगाई जाए, इंजन में शौचालय की व्यवस्था की जाए, सभी सुरक्षा उपकरण एक समान निश्चित स्थान पर लगाया जाए।शरद शिवहरे /ईएमएस /16 मई