जासूसी के डर से फोन भी किए नष्ट बीजिंग(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीन दिवसीय यात्रा पर चीन आए हुए थे। यहां उनकी जमकर खातिरदारी की गई। उन्हे महंगे-महंगे गिफ्ट भी दिए गए। लेकिन ट्रंप ने अपने विमान पर चढ़ने से पहले ही सभी तोहफे कूड़ेदान में फेंक दिए। जासूसी और चीनी साइबर हमले के जरिए डेटा चोरी के डर से ट्रंप के पूरे डेलिगेशन ने राष्ट्रपति के विशेष विमान एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले, चीनी अधिकारियों और मेजबानों द्वारा दिए गए सभी गिफ्ट्स, गैजेट्स और अन्य सामानों को या तो नष्ट कर दिया या फिर वहीं बीजिंग में ही छोड़ दिया। सुरक्षा से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने बीजिंग से उड़ान भरने से ठीक पहले उन सभी चीजों को एक जगह इकट्ठा किया जो उन्हें उनकी चीन यात्रा के दौरान मिली थीं। इनमें व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को जारी किए गए बर्नर फोन, डेलिगेशन पिन, यात्रा के दौरान इस्तेमाल हुए क्रेडेंशियल्स (पहचान पत्र) और अन्य उपहार शामिल थे। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले इन सभी चीजों को डस्टबिन में फेंक दिया गया या फिर पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी प्रेस पूल के साथ यात्रा कर रहे वरिष्ठ संवाददाताओं ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा कारणों से विमान में चीन से जुड़ा कुछ भी ले जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, वाशिंगटन लौट रहे ट्रंप प्रशासन या व्हाइट हाउस की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की हाई-लेवल काउंटर-इंटेलिजेंस और सुरक्षा प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति या उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल चीन जैसे रणनीतिक रूप से विरोधी देशों का दौरा करते हैं, तो संभावित इलेक्ट्रॉनिक जासूसी, बगिंग या डेटा हैकिंग के खतरे से बचने के लिए अधिकारी मानक प्रोटोकॉल के तहत सभी स्थानीय उपकरणों और संवेदनशील सामग्रियों को नष्ट कर देते हैं। गौरतलब है कि यह करीब 9 साल में डोनाल्ड ट्रंप का पहला चीन दौरा था, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरे पर दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, ताइवान का मुद्दा और ईरान में चल रहा युद्ध जैसे चार बेहद संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। भले ही सार्वजनिक रूप से यह दौरा काफी भव्य और सौहार्दपूर्ण दिखा हो, लेकिन वापसी के समय अमेरिकी डेलिगेशन द्वारा अपनाए गए इस सख्त सिक्योरिटी प्रोटोकॉल से साफ जाहिर होता है कि अमेरिका और चीन के रिश्तों में अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है। वीरेंद्र/ईएमएस/16मई 2026