क्षेत्रीय
16-May-2026
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रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। अब तक वे इस पद पर प्रभारी डीजीपी के रूप में कार्यरत थे। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा गठित पैनल की अनुशंसा के बाद राज्य शासन ने यह निर्णय लिया। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में गिना जाता है। उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक स्थिरता और पुलिसिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अरुण देव गौतम का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। वे पांच भाइयों और एक बहन में सबसे अलग पहचान बनाने वाले अधिकारी बने। शिक्षा की शुरुआत उन्होंने अपने गांव के सरकारी स्कूल से की, जहां उन्होंने आठवीं तक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे अपने बड़े भाई के पास प्रयागराज चले गए, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और फिर राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। यूपीएससी की तैयारी के लिए वे नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) पहुंचे, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल किया और पीएचडी की पढ़ाई भी शुरू की। पहले प्रयास में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पूरी लगन के साथ दोबारा परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में चयन हासिल किया। 12 अक्टूबर 1992 को उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में औपचारिक रूप से योगदान दिया। प्रशिक्षण के दौरान उनकी पहली पोस्टिंग मध्यप्रदेश के जबलपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर में सीएसपी के रूप में सेवाएं दीं। वे कवर्धा में एसडीओपी और भोपाल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर भी कार्यरत रहे। इसके अलावा उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। एसपी के रूप में उनका पहला जिला राजगढ़ रहा, जहां उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वे प्रदेश पुलिस प्रशासन में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। अब उन्हें पूर्णकालिक डीजीपी बनाकर राज्य सरकार ने पुलिसिंग व्यवस्था की कमान उनके हाथों में सौंप दी है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)16 मई 2026