बुरहानपुर (ईएमएस)। नीट 2026 की परीक्षा निरस्त होने का मुद्दा देशभर में राजनीतिक और शैक्षणिक बहस का केंद्र बन गया है। लगभग 22 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने इस परीक्षा में भाग लिया था, जिन्होंने पूरे साल कठिन परिश्रम, कोचिंग और आत्मअनुशासन के साथ तैयारी की थी। ऐसे में परीक्षा देने के बाद रद्द होने से छात्रों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश और निराशा देखी जा रही है। इस संबंध में मीडिया प्रभारी तपसूल हुसैन मुलायम वाला ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस का आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की लापरवाही और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। पार्टी ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। शनिवार को बुरहानपुर में इस मामले को लेकर मशाल जुलूस निकल गया जिस पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, वह क्यों नहीं की गई । कांग्रेस जिला अध्यक्ष रिंकू टॉक ने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह भ्रष्ट है उसके शासनकाल में अब तक सैकड़ो बार अनेक परीक्षाएं रद्द हो चुकी है परीक्षा से पूर्व पेपर कैसे लीक हो जाते हैं इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। जहां एक ओर वह भाजपा सरकार को घेर रही है, वहीं अब तक शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की स्पष्ट मांग नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, तो उसे स्पष्ट और ठोस मांगें सामने रखनी चाहिए। केवल मशाल जुलूस निकालने और नारेबाजी करने से छात्रों का भला नहीं होगा इस पूरे प्रकरण ने न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को भी प्रभावित किया है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार पारदर्शी जांच कराए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधार लागू करे। अकील आजाद/ईएमएस/17/05/2026