होर्मुज में नई चाल चलने जा रहा ईरान तेहरान(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया युद्ध के कारण दुनिया भर में पैदा हुए ईंधन संकट के बाद अब वैश्विक इंटरनेट पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। दो महीने से अधिक समय से जारी तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले से ही बंद पड़ा है, जिससे एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई चेन ठप है। इस बीच, ईरान अब समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को नया हथियार बनाने की धमकी दे रहा है। ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे सक्रिय उन महत्वपूर्ण फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को निशाना बना सकता है, जो खाड़ी देशों, एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसफर का मुख्य जरिया हैं। रणनीतिक रूप से इस समुद्री रास्ते के नीचे कई बेहद महत्वपूर्ण नेटवर्क सक्रिय हैं। इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया को यूरोप से जोड़ने वाला एएई-1 नेटवर्क, भारत और श्रीलंका को खाड़ी देशों व मिस्र से जोड़ने वाला फेलकॉन नेटवर्क और पूरे खाड़ी क्षेत्र को जोड़ने वाला गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार, दुनिया का 99 फीसदी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं सबसी केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स यूएई, कतर, सऊदी अरब जैसे डिजिटल देशों की लाइफलाइन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन केबल्स को नुकसान पहुंचने पर इंटरनेट स्पीड धीमी हो जाएगी, ऑनलाइन बैंकिंग ठप होगी और अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान होगा, क्योंकि सैटेलाइट्स कभी भी इन केबल्स जितना भारी डेटा लोड नहीं संभाल सकते। इस बीच, पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। युद्ध के बाद सीजफायर होने के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है और कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर फिर से बड़ा सैन्य हमला कर सकता है, जिससे यह संकट और अधिक गहराने की आशंका है। केबल्स पर शुल्क लगाएगा ईरान ईरानी रेवलूशनरी गार्ड्स से जुड़े सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने सोशल मीडिया पर इस नई रणनीति का संकेत देते हुए कहा कि वे इन केबल्स पर शुल्क लगाएंगे। इस योजना के तहत ईरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज वैश्विक टेक कंपनियों से इन अंडरसी केबल्स के इस्तेमाल के लिए भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने की तैयारी में है। इसके अलावा, इन केबल्स की मरम्मत और रखरखाव का काम भी केवल ईरानी कंपनियों को देने की शर्त रखी जा रही है। ईरान का कहना है कि यदि टेक कंपनियों ने उसके नियमों को नहीं माना, तो इस रूट के पूरे इंटरनेट ट्रैफिक को ठप कर दिया जाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस/18मई 2026