क्षेत्रीय
19-May-2026
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- लापरवाही और खराब मौसम के बीच झूलों पर सख्ती - प्रदेशभर के हादसों के बाद जागा प्रशासन गुना के समर मेले में मिक्की माउस, हवाई झूला और नाव सहित सभी बड़े झूलों पर लगा प्रतिबंध गुना (ईएमएस)। पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मेलों के दौरान झूलों के टूटने और पलटने की लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने जनसुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में गुना जिले के बजरंगगढ़ स्थित ऐतिहासिक बीस भुजा देवी मंदिर मेले में एक मिक्की माउस झूला अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिसकी चपेट में आने से एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हृदयविदारक हादसे और प्रदेशभर से आ रही इसी तरह की अप्रिय खबरों के बाद आखिरकार स्थानीय जिला प्रशासन की तंद्रा टूटी है। शहर के हृदय स्थल प्रताप छात्रावास प्रांगण में संचालित हो रहे समर मेले में उमड़ रही भीड़ और सुरक्षा मानकों में बरती जा रही घोर अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। अनुविभागीय दंडाधिकारी अधिकारी गुना शिवानी पांडे ने आम जनता की जान-माल की सुरक्षा के मद्देनजर एक सख्त आदेश जारी किया है, जिसके तहत मेले में संचालित हो रहे आकाश छूते हवाई झूले (जाइंट व्हील), नाव नुमा झूले (कोलंबस), मिक्की माउस और ब्रेक डांस सहित तमाम छोटे-बड़े और मध्यम आकार के जोखिम भरे झूलों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के पीछे केवल बजरंगगढ़ की घटना ही नहीं, बल्कि पिछले दिनों पूरे मध्य प्रदेश के विभिन्न अंचलों में मेलों के भीतर झूलों के अनियंत्रित होने, गिरने और तकनीकी खराबी के कारण नागरिकों के घायल होने की सिलसिलेवार दुर्घटनाएं भी मुख्य वजह रही हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में कभी झूलों की केबल टूटने तो कभी तेज आंधी-तूफान के बीच बिना सुरक्षा प्रमाण पत्र के धड़ल्ले से झूला चलाने के कारण बड़े हादसे हो चुके हैं। इन तमाम दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए गुना एसडीएम शिवानी पांडे ने साफ किया है कि वर्तमान में समूचे अंचल का मौसम अत्यधिक प्रतिकूल बना हुआ है। लगातार तेज हवाएं चल रही हैं और शाम होते ही मौसम में अचानक बदलाव आ रहा है, जिसके चलते लोहे के ऊंचे हवाई झूलों और नाव जैसे भारी-भरकम झूलों के संचालन में किसी भी समय भयंकर तकनीकी खराबी या पलटने की आशंका बनी रहती है। किसी भी तरह की संभावित जनहानि को रोकने और संचालकों द्वारा सुरक्षा से किए जा रहे खिलवाड़ पर अंकुश लगाने के लिए ही मिक्की माउस सहित हर उस झूले को सील करने का निर्देश दिया गया है जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, प्रताप छात्रावास में चल रहा समर मेला अपने निर्धारित स्वरूप में पूर्व की तरह ही जारी रहेगा, लेकिन वहां केवल खान-पान, घरेलू साज-सज्जा और खरीदारी के स्टॉल ही लगाए जा सकेंगे। एसडीएम ने मेला संचालकों को समय सीमा का पालन करने की सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि मेले का संचालन केवल शाम 5 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक ही किया जा सकेगा। यदि तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी देर रात तक मेला चालू पाया गया या फिर चोरी-छिपे किसी भी प्रतिबंधित झूले को चलाने का प्रयास किया गया, तो मेला आयोजकों और संबंधित झूला संचालकों के खिलाफ सीधे थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और वैधानिक जब्ती की कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि प्रताप छात्रावास परिसर में चल रहे इस मेले में पिछले दिनों भी भारी लापरवाही का एक बड़ा नजारा सामने आया था, जब तेज हवा के झोंकों के कारण वहां लगा एक मिक्की माउस झूला अचानक ढह गया था। झूला ढहते ही वहां खेल रहे बच्चों में चीख-पुकार मच गई थी और उनके माता-पिता में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इस गंभीर घटना के बाद जब जागरूक और पीडि़त अभिभावकों ने मौके पर मौजूद झूला संचालकों से सुरक्षा मानकों और फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर सवाल किए, तो संचालकों ने अपनी गलती मानने के बजाय पीडि़त परिवारों के साथ जमकर अभद्रता, गाली-गलौज और बदसलूकी की थी। इस पूरे विवाद और दादागिरी की लिखित शिकायत पीडि़त नागरिकों द्वारा कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय में दर्ज कराई गई थी। मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में हुए हादसों की पृष्ठभूमि, बजरंगगढ़ में मासूम की मौत का दर्द और प्रताप छात्रावास मेले के संचालकों की इस घोर मनमानी को संज्ञान में लेकर ही प्रशासन ने अब जनहित में यह बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है, ताकि गुना शहर के भीतर किसी बड़े हादसे को वक्त रहते टाला जा सके। इनका कहना है पिछले कुछ समय से मेलों में झूलों के कारण कुछ घटनाएं घटित हुई हैं। पूर्व में नवरात्र के दौरान बीसभुजा देवी मंदिर परिसर में लगे झूले के कारण एक किशोर की मौत हुई। हनुमान जयंती पर टेकरी पर रात में अचानक मौसम बदला। तब स्थिति प्रतिकूल हो गई थी। अभी तापमान 44 डिग्री के आसपास चल रहा है। अभी एक व्यक्ति मेरे पास शिकायत लेकर आए थे मीना बाजार में झूले में उनका बच्चा दबते दबते बचा। लिखित में उन्हेांने शिकायत की थी। हमने सभी जगह मना किया है। और आगे जब भी अनुमति देंगे तो कड़ी कंडीशन लगाकर दें। कई बार झूला वाले अनुमति ले लेते हैं जो नियम पालन होना चाहिए वह पालन नहीं होते। परिणाम किसी की मौत तो किसी के घायल होने की खबरें आती हैं। हम चाहते हैं सब काम हो, सब कमाएं लेकिन व्यवस्थित और नियमानुसार। जो व्यक्ति झूला लगा रहा है उसकी पूरी जिम्मेदारी है, बीमा से लेकर फिटनेस, सुरक्षा आदि देने की। मैंने एसडीएम को निर्देशित किया है जिस व्यक्ति के झूले से मौत हुई है उससे मुआवजा दिलवाएंगे। जिन लोगों से यह सिफारिश कराते हंै जब दुर्घटना होती है तो वह सब भाग जाते हैं। मुझे बड़ा दुख होता है समाज के कुछ लोग उनकी सिफारिश में आते हैं। हम पूछते हैं कि कोई दुर्घटना होगी तो क्या आप देंगे 1 करोड़ का मुआवजा, तो सब पीछे हट जाते हैं। जब बड़ी दुर्घटना होती है तो सभी कहते हैं कि प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए। डीजे वाले मामले में भी यहीं हुआ। मेला बंद नहीं हुआ है बस झूले को प्रतिबंधित किया है। - किशोर कुमार कन्याल, कलेक्टर - सीताराम नाटानी