राष्ट्रीय
19-May-2026
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-कोर्ट ने नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण विवाद में दखल से किया इनकार नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर आम लोगों को परेशान करने, सड़कें जाम करने या भय का माहौल बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामला उस मांग से संबंधित था, जिसमें एयरपोर्ट का नाम ‘लोकनेता डीबी पाटिल नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने की अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे। बेंच ‘प्रकाशज्योत सामाजिक संस्था’ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एयरपोर्ट के नाम को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार को तय समयसीमा में नामकरण पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग भी की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एयरपोर्ट का नाम क्या होना चाहिए, यह नीति निर्धारण का विषय है और अदालत का काम नहीं है कि वह सरकार को इस संबंध में आदेश दे। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी मांग उठाने और उचित मंच पर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। अगर सरकार तुरंत जवाब नहीं देती, तो लोगों को अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से लगातार उठाते रहना चाहिए।” सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अदालत ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहती जिससे बाद में असहज स्थिति पैदा हो। उन्होंने टिप्पणी की, “कल सरकार कह सकती है कि वह ऐसा नाम रखना ही नहीं चाहती। ऐसे में अदालत को आदेश पारित करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।” सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अन्य माध्यम अपनाने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इस पर सीजेआई ने कहा कि लोकतंत्र में कई बार मांगों को लगातार उठाना पड़ता है और अंततः संबंधित अधिकारी इस पर निर्णय लेने के लिए बाध्य होते हैं। हिदायत/ईएमएस 19मई26