अंतर्राष्ट्रीय
20-May-2026
...


-मोदी और क्रिस्टर्सन ने वैश्विक चुनौतियों को लेकर लिखा संयुक्त लेख स्टॉकहोम,(ईएमएस)। पीएम नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने वैश्विक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता को लेकर एक संयुक्त लेख लिखा। इस लेख में दोनों नेताओं ने दुनिया से अपील की है कि मौजूदा दौर में देशों को अलग-थलग होने के बजाय साझेदारी और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान कोई देश अकेले नहीं निकाल सकता। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लेख में दोनों नेताओं ने कहा, ‘ऐसे वक्त में जब संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद का महत्व और भी ज्यादा हो गया है, साथ ही वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की जरुरत को अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। दोनों नेताओं ने लेख में लिखा- क्लाइमेट एक्शन को विकास से अलग नहीं किया जा सकता1 दुनिया के करोड़ों लोग अब भी बेहतर जीवन, रोजगार, ऊर्जा और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है। पीएम मोदी ने लेख में भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और साथ ही बड़े स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजिशन भी कर रहा है। भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। वहीं स्वीडन की तारीफ करते हुए कहा कि उसने यूरोप में जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाई है1 स्वीडन का बिजली ग्रिड करीब 98 फीसदी फॉसिल-फ्यूल फ्री हो चुका है और 1990 के बाद से वहां उत्सर्जन में एक-तिहाई से ज्यादा कमी आई है, जबकि अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 2019 में भारत और स्वीडन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से शुरू किए गए ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पहल ने इंडस्ट्रियल डिकार्बोनाइजेशन और क्लीन इंडस्ट्री को वैश्विक बहस के केंद्र में लाने का काम किया है। लेख में दोनों नेताओं ने कहा कि हर देश को अपनी जरूरतों के हिसाब से तकनीक अपनाने और उसे बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए इसके समाधान भी वैश्विक होने चाहिए। उन्होंने 2030 तक इस वैश्विक गठबंधन को और मजबूत करने की अपील की और नॉर्डिक देशों समेत दूसरे देशों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया। दोनों नेताओं ने संयुक्त लेख के अंत में साफ संदेश दिया कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सहयोग में है, टकराव में नहीं। सिराज/ईएमएस 20 मई 2026