अंतर्राष्ट्रीय
20-May-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका और पाकिस्तान दुनिया को ऊपर-ऊपर से भले ही अच्छे रिश्ते दिखा रहे हों, लेकिन हाल ही में हुए डिप्लोमैटिक केबल लीक्स बताती हैं कि इन दोनों देशों में कभी एकमत रही ही नहीं। साल 2022 के एक सीक्रेट दस्तावेज में सामने आया है कि अमेरिका-पाकिस्तान के बीच मतभेद इतने ज्यादा थे कि पाकिस्तान को हमेशा इसकी शिकायत रही कि अमेरिका पाकिस्तान को कश्मीर के मामले पर पूरा समर्थन नहीं देता है। ये सीक्रेट लीक्स मीडिया हाऊस की ओर से की गई, जिसमें ये बात सामने आई है। इन सीक्रेट खुलासे में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कश्मीर, यूक्रेन युद्ध और चीन जैसे मुद्दों पर गहरे मतभेद हैं। ये लीक 7 मार्च, 2022 को पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिकी राजदूत आसद मजीद खान ने अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू से हुई मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। खान ने कहा कि वॉशिंगटन पाकिस्तान से हर मुद्दे पर समर्थन की उम्मीद करता है, लेकिन कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान को समर्थन नहीं देता। बता दें कि भारत हमेशा से कहता रहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। पाकिस्तान ने शिकायत की कि भारत के यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रहने और रूस से संबंध बनाए रखने पर अमेरिका का रुख काफी नरम रहा, जबकि इस मामले में पाकिस्तान पर दबाव ज्यादा था। पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिकी राजदूत खान ने लू से कहा कि अमेरिकी सीनेट सब-कमिटी की सुनवाई में भारत के रुख का बचाव करते हुए लू का बयान पाकिस्तान को दोहरे मापदंड का एहसास कराता है। पाकिस्तान के मुताबिक अमेरिका भारत और पाकिस्तान के लिए अलग-अलग मापदंड रखता है। लू ने जवाब में कहा कि अमेरिका भारत को मुख्य रूप से चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखता है। बता दें कि साल 2022 का दस्तावेज फिर से चर्चा में आया है जब ट्रंप प्रशासन में पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर आंतरिक बहस चल रही है। पेंटागन और सीआईए पाकिस्तान के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ अधिकारी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केबल दिखाता है कि अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में गहरी अविश्वास की दीवार बनी हुई है। पाकिस्तान लगातार अमेरिका से कश्मीर और क्षेत्रीय मुद्दों पर समर्थन मांगता रहा है, लेकिन वॉशिंगटन की प्राथमिकता हमेशा चीन को काउंटर करने वाली भारत-केंद्रित रणनीति रही है। आशीष/ईएमएस 20 मई 2026