अंतर्राष्ट्रीय
20-May-2026
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खत्म हो रहा अमेरिका का वर्चस्व मॉस्को,(ईएमएस)। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग यात्रा ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात को मॉस्को-बीजिंग एक्सिस के रूप में दिखाया जा रहा है, जो अमेरिका के प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रहा है। दोनों देशों ने डॉलर-मुक्त आर्थिक गठबंधन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं, इसके तहत अब तेल और गैस का कारोबार अमेरिकी डॉलर के बजाय रूसी रूबल और चीनी युआन में करने का ऐलान किया है। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की दशकों पुरानी पकड़ को कमजोर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। रूस और चीन के बीच व्यापारिक लेनदेन पहले ही काफी हद तक डी-डॉलराइज़्ड हो चुका है। दोनों देशों के बीच 200 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार अब अधिकतर रूबल और युआन में हो रहा है, जो उनकी बढ़ती आर्थिक आत्मनिर्भरता को दिखाता है। इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए, दोनों नेता आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका पर भी चर्चा कर सकते है। यह यात्रा चीन-रूस मैत्री संधि की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है, जो उनके गहरे संबंधों का प्रतीक है। कटूनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन एक ओर अमेरिका के साथ अपने संबंधों को स्थिर रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है। वह खुद को एक ऐसी बड़ी शक्ति के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है जो पश्चिम और रूस दोनों के बीच संतुलन स्थापित कर सके। हालांकि, रूस और चीन की यह बढ़ती नजदीकी अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए एक गंभीर रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है। दोनों देश बिक्स को नए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का आधार बनाने की कोशिश में हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि यह गठबंधन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए है। लेकिन पश्चिमी देश इस गठबंधन को अमेरिकी प्रभाव को कम करने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। वैश्विक भुगतान प्रणाली और ऊर्जा बाजारों में ये बदलाव दुनिया को नए आर्थिक गुटों की ओर धकेल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। आशीष/ईएमएस 20 मई 2026