अंतर्राष्ट्रीय
20-May-2026
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ईरान जंग पर अमेरिकी सीनेट में ट्रंप की पार्टी में बगावत वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर जारी कूटनीतिक और राजनीतिक खींचतान के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी में बड़ी बगावत देखने को मिली है। सीनेट में ईरान युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वॉर पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति के अधिकारों पर लगाम लगाने का प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हो गया। इस वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति ट्रंप के रुख के खिलाफ जाकर विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जबकि तीन अन्य रिपब्लिकन सांसद वोटिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। सत्तारूढ़ पार्टी के सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इस क्रॉस-वोटिंग को राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, खाड़ी क्षेत्र में यह लड़ाई पिछले 81 दिनों से खिंचती चली आ रही है और इसका कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है। इस युद्ध में अब तक 10 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग चैनल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करना पड़ा है। इस सैन्य अभियान में अमेरिका को अब तक लगभग 29 अरब डॉलर की भारी कीमत चुकानी पड़ी है, जिससे उसके सहयोगी देशों के साथ रिश्ते भी प्रभावित हो रहे हैं। इस कानून को पूरी तरह प्रभावी करने के लिए डेमोक्रेट्स को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल मुश्किल है क्योंकि दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बढ़त हासिल है। इस बीच, युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, जहां ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे के समक्ष शर्तों और पाबंदियों से जुड़े जवाबी प्रस्ताव पेश किए हैं। ट्रंन ने संवैधानिक सीमाओं का किया उल्लंघन सीनेट में हुए इस मतदान का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप को तुरंत सेना वापस बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, लेकिन यह उन सांसदों की बड़ी नैतिक जीत है जो यह तर्क दे रहे थे कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन किया है। डेमोक्रेट्स ने वॉर पावर्स एक्ट का हवाला दिया है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के 60 दिनों से अधिक समय के लिए सेना तैनात नहीं रख सकते। आलोचकों के अनुसार यह समय सीमा 1 मई को ही खत्म हो चुकी थी, जबकि व्हाइट हाउस का दावा है कि युद्धविराम की घोषणा के चलते ट्रंप के पास अभी भी एकतरफा सेना तैनात रखने का समय शेष है। वीरेंद्र/ईएमएस/20मई 2026