-कूपर ने कहा- वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के चलते बढ़ाना पड़ रहा रक्षा खर्च लंदन,(ईएमएस)। ब्रिटेन सरकार ने अपनी खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए विदेशी सहायता में एक बहुत बड़ी कटौती करने का ऐलान किया है। इस ऐतिहासिक कटौती का सबसे घातक असर जिस पाकिस्तान पर पड़ने वाला है। ब्रिटेन ने अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए विदेशी सहायता यानी फॉरेन फंड में कटौती किए जाने का ऐलान किया। इसका सबसे ज्यादा असर झेलने वाले देशों में पाकिस्तान भी है। एक रिपोर्ट में के मुताबिक ब्रिटेन सरकार ने 2027 तक अपनी विकास सहायता को सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) के 0.5 फीसदी से घटाकर 0.3 फीसदी करने का फैसला लिया है। इसके तहत विदेशी सहायता में 6 अरब डॉलर से ज्यादा की कटौती की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और मोजाम्बिक को सबसे ज्यादा झटका लगेगा, जबकि यमन, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों को भी सीधे फंड में कमी का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की विदेश मंत्री अवैत कूपर ने संसद में कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, खासकर यूक्रेन युद्ध के चलते सरकार को रक्षा खर्च बढ़ाना पड़ रहा है, इसलिए ‘कठिन फैसले और समझौते’ करने पड़ रहे हैं। कोविड-19 महामारी से पहले ब्रिटेन अपनी जीएनआई का 0.7 फीसदी विदेशी सहायता पर खर्च करता था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है। ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि अब वो विकासशील देशों में निजी निवेश और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए ‘निवेश आधारित साझेदारी’ मॉडल पर ज्यादा ध्यान देगी। रिपोर्ट के मुताबिक इन कटौतियों से कई देशों के विकास कार्यक्रम प्रभावित होंगे और उन्हें वैकल्पिक आर्थिक सोर्सेस, खासकर प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली रकम पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। पाकिस्तान में विदेशों में रहने वाले 80 लाख से ज्यादा नागरिकों से आने वाली रकम बढ़कर करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे विदेशी सहायता में आई कमी की थोड़ी-बहुत भरपाई हो रही है। वहीं मोजाम्बिक जैसे देशों, जहां प्रवासी आय कम है, उनको संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है, खासकर हाल की बाढ़ के बाद जब लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। सिराज/ईएमएस 20मई26